जानिए निवेश का 10 प्रतिशत का नियम | Power of Investment In Hindi

“एकल आय पर निर्भर कभी नहीं रहना चाहिये. दूसरा स्रोत बनाने के लिए इन्वेस्टमेंट करें। “

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Power of Investment In Hindi

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निवेश क्या है? ( Power of Investment In Hindi )

अपने पैसों को महंगाई की मार से बचाने के लिए आपको अपने पैसों का निवेश ऐसी जगह करना होगा जहां आप महंगाई को मात दे सके। आपको पता होगा कि प्रतिवर्ष महंगाई दर लगभग 6% की दर से बढ़ रही है। तो अगर आपको अपने पैसों को महंगाई की मार से बचाना है तो आपको ऐसी जगह निवेश करना पड़ेगा जहां आपको 6% से ज्यादा का रिटर्न मिल सके।

Investment is the dedication of an asset to attain an increase in value over a period of time. Investment requires a sacrifice of some present asset, such as time, money, or effort. In finance, the purpose of investing is to generate a return from …

Definition By Wikipedia

अगर आप अपनी कमाई का केवल 10% बचाते है और उसे सही जगह इन्वेस्टमेंट करते हैं तो कुछ सालों बाद ही कंपाउंडिंग इफेक्ट से आपका धन इतना हो जाएगा कि आप देखकर हैरान रह जाएंगे।

अपनी कमाई का 10% बचत करने की बात पर आप शायद यह कह सकते हैं कि हमारे खर्चे इतने ज्यादा है कि बचत के लिए हमारे पास पैसे बचते ही नहीं है। या आप कह सकते हैं कि मेरी आमदनी कम है और इन्वेस्टमेंट के लिए मेरे पास पैसे नहीं है। या ऐसे ही बहुत से कारण आप मुझे बता सकते हैं।  

लेकिन मैं आपको ऐसे ही एक व्यक्ति के बारे में बताना चाहता हूं। जो बहुत ज्यादा कठिन परिस्थितियों से गुजरें। और समय-समय पर की गई छोटी-छोटी बचतों व उन्हें सही जगह निवेश करके एक अरबपति भी बने। मैं बात कर रहा हूं रिच डैड एंड पुअर डैड पुस्तक के लेखक रॉबर्ट कियोसाकी के बारे में। रॉबर्ट की जिंदगी में एक समय ऐसा था जब उसे हर तरफ से केवल निराशा ही मिल रही थी। वह जो भी व्यवसाय करते थे उसी में उन्हें नुकसान होता था।

इस तरह से उनके सिर पर कर्ज का बोझ भी बढ़ गया था। जिसके कारण उन्हें व उनकी पत्नी किम कियोसाकी को एक छोटी सी कंपनी में नौकरी करनी पड़ी। जहां उन्हें वेतन के रूप में बहुत कम पैसा मिलता था। लेकिन उन्होंने अपनी अमीर बनने की इच्छा को कभी नहीं छोड़ा।

वे अपनी सैलरी मिलते ही सबसे पहले इसका 10% अलग से निकाल लेते थे और उसे अच्छी जगह निवेश कर देते थे। और उसके बाद ही अपने बाकी के खर्चे करते थे। चाहे कितनी भी कठिनाई हो लेकिन शुरुआत में ही अपनी सैलरी का 10% निवेश करने की आदत को उन्होंने कभी नहीं छोड़ा। उनकी इसी आदत के कारण ही उन्होंने एक दिन वित्तीय स्वतंत्रता हासिल की और एक अरबपति भी बने।    

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निवेश की शक्ति ( Power of Investment )

पैसों के मामले में इंसान की एक खास प्रवृत्ति है। वह अपनी आमदनी के हिसाब से अपने खर्चों का संयोजन कर लेता है। और जो इस गुण के बारे में जानकारी नहीं रखते वे हमेशा इससे नुकसान उठाते हैं। और जो इसको समझते हैं वे इसका हमेशा फायदा उठाते हैं।  

अगर हम भी इस खास गुण का फायदा उठाना चाहे तो हमें सबसे पहले यह करना होगा कि आपके पास जब भी कमाई के रूप में पैसा आता है। तो सबसे पहले बिना किसी भी प्रकार का खर्च किए उसका कम से कम 10% और अगर हो सके तो इससे ज्यादा भी अलग से निकाल ले और उन्हें किसी अच्छी जगह निवेश कर दें।

उसके बाद ही अपने अन्य खर्चे करें। जब हम ऐसा करते हैं तो हमारे दिमाग को यह संकेत मिल जाता है कि हमें बाकी का पूरा महीना उन्हीं बचे हुए पैसों में निकालना है। और हमारा दिमाग अपने आप हमारे खर्चों का संयोजन कर देता है। और हमारा पूरा महीना बिना किसी परेशानी के निकल जाता है।

जब आप इस तरह अपनी कमाई का एक छोटा सा हिस्सा निकालकर उसे निवेश करते रहेंगे तो आप एक दिन देखेंगे कि आपके पैसों का यह छोटा सा पेड़ एक दिन बहुत बड़ा वृक्ष बन गया है। और इस वृक्ष के नीचे व आसपास और भी बहुत सारे छोटे-छोटे पैसों के पोधें उग आए हैं। जो एक दिन बड़े हो जाएंगे और आप उस दिन एक दौलतमंद व्यक्ति बन जाएंगे।

मैंने अपने इस ब्लॉग में कई जगह छोटी-छोटी बचत और उनको सही जगह निवेश करने के बारे में बताया है। आप शायद इसे पढ़कर यह सोचे कि सही जगह निवेश से मेरा क्या मतलब है। तो इसके लिए आप मेरा यह ब्लॉग पढ़ सकते है –

अपने बचत के पैसे को सही जगह कैसे निवेश करें और 2022 में निवेश के सबसे कारगर तरीके कौन से हैं। ” 

इन्वेस्टमेंट शुरू करने से पहले आपको यह जानना सबसे जरूरी है कि इन्वेस्टमेंट कितनी तरह के होते हैं। समझदार निवेशक किसी भी विकल्प में  इन्वेस्टमेंट करने से पहले यह देखते हैं कि उस विकल्प में इन्वेस्टमेंट करने का रिस्क लेवल कितना है। यानी आपकी मूल राशि पर नुक़सान होने की संभावना कितनी है। ऊपर दिए गए किसी भी विकल्प में इन्वेस्टमेंट करने से पहले आपको भी यह देखना होता है कि उस विकल्प में रिस्क लेवल क्या है। 

आज की इस भागदौड़ भरे जीवन में हर कोई सुरक्षित निवेश की तरफ़ भागता है। लेकिन कई बार किसी के बहकावे या अन्य किसी लालच के कारण हम अपने पैसे का निवेश किसी ऐसी जग़ह कर देते है, जहां हमें अपने पैसे पर नुकसान की संभावना ज्यादा होती है।

हर किसी की निवेश पर रिस्क उठाने की क्षमता अलग अलग होती है। इसीलिए जब हम शुरुआत में ही अपनी रिस्क वहन क्षमता को जान कर चलते है तो हमे पता रहता है की हम अपने निवेश पर कितनी सीमा तक नुकसान वहन कर सकते है। इसीलिए आपको यह जानना बहुत जरुरी है की रिस्क लेवल के आधार पर निवेश कितनी तरह के होते है।

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इन्वेस्टमेंट 3 तरह के होते हैं ( Types Of Investment )

1. कम जोखिम इन्वेस्टमेंट ( Low Risk Investments) 

निवेश के वे विकल्प जिनमें आप की मूल राशि पर नुकसान की संभावना बिल्कुल कम या ना के बराबर होती है वे कम जोखिम वाले निवेश होते हैं। इनमें वे योजनाएं आती है जिनका नियमन व प्रबंधन सरकार द्वारा किया जाता है जैसे कि पीपीएफ ( Public Provident Fund ), एस एस ए ( Sukanya Samriddhi Account ), एनएससी ( National Savings Certificate ), फिक्स डिपॉजिट या सरकारी बॉन्ड्स।  

इस तरह के निवेश पर मिलने वाले ब्याज की दर भी कम होती है इसलिए इसे लो रिस्क लो रिटर्न ( Low Risk Low Returns ) निवेश भी कहा जाता है। इस कैटेगरी के तहत निवेश के वे  विकल्प आते हैं जिनमें रिटर्न्स रेट्स  6 % से 8% के लगभग रहती है।  

2. मध्यम जोख़िम इन्वेस्टमेंट ( Medium Risk Investments) 

जैसा कि नाम से ही आपको पता चल रहा होगा कि इस तरह के निवेश में आपकी राशि पर नुकसान की संभावना तो रहती है लेकिन यह कम होती है। म्यूच्यूअल फंड्स, डेट फंड्स, इंडेक्स फंड्स, एनपीएस ( नेशनल पेंशन सिस्टम ),  यूलिप प्लांस आदि इसी तरह के निवेश विकल्प है। लेकिन इन पर मिलने वाले ब्याज की दर भी कम जोख़िम वाले निवेश से ज्यादा रहती है। इस कैटेगरी के तहत निवेश के वे  विकल्प आते हैं जिनमें रिटर्न्स रेट्स  8% से 12% के लगभग रहती है।  

3. ऊँच जोख़िम इन्वेस्टमेंट ( High Risk Investments) 

निवेश में रिस्क की इस कैटेगरी में निवेश के वे विकल्प आते हैं जिनमें आप की मूल राशि के पूरी तरह से डूब जाने का खतरा भी रहता है। लेकिन दूसरी तरफ निवेश के सभी विकल्पों में यही विकल्प ऐसे भी होते हैं जहां निवेश पर आपको सबसे ज्यादा रिटर्न भी मिलता है। निवेश की हाई रिस्क कैटेगरी में शेयर मार्केट, म्यूच्यूअल फंड्स, क्रिप्टो करेंसी इन्वेस्टमेंट आदि आते हैं।

अगर आप सही से देख परख के इन निवेश विकल्पों में निवेश करते हैं तो आप 30% – 40% तक भी रिटर्न कमा सकते हैं इसलिए इसे हाई रिस्क हाई रिटर्न ( High Risk High Returns ) निवेश विकल्प भी कहा जाता है निवेश के इस विकल्प में आपको 15% से 30% या 40% तक रिटर्न मिल सकता है।   

इन्वेस्टमेंट में टाइम फैक्टर बहुत मायने रखता है। अगर आप छोटी उम्र में निवेश शुरू करते है, तो आप अपने पैसों को grow करने में ज्यादा समय दे सकते है। और समय वह फैक्टर है जो आपके पैसों को कंपाउंडिंग की ताकत से कई गुना अधिक तेजी से वृद्धि करने में सबसे अधिक महत्त्व रखता है।

टाइम फैक्टर का इन्वेस्टमेंट में क्या महत्व है ( Time factor in investment )

“हमेशा लम्बी अवधि के लिए इन्वेस्टमेंट करें। ”

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इन्वेस्टमेंट में समय के महत्त्व ( टाइम फैक्टर ) को समझने के लिए में आपको एक छोटा सा उदाहरण देता हूं। मान लीजिए अगर आप अपने बच्चे के जन्म के समय से सिर्फ ₹1000 महीना किसी ऐसी जगह निवेश करते हैं। जहां आपको सिर्फ अपनी राशि पर 15% सालाना ब्याज मिलता रहे। तो आप जानकर हैरान रह जाएंगे कि यह ₹1000 प्रति महीने की राशि 15% के सालाना रिटर्न से बच्चे के 25 साल का होने तक 32.8 लाख रुपए हो जाएगी। और अगर अपना इन्वेस्टमेंट बच्चे की रिटायरमेंट की उम्र यानी 60 साल तक तक चालू रखते है तो यह राशि बच्चे के 60 साल का होने पर 62 करोड़ रुपए हो जाएगी।

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हम यह कहावत बचपन से सुनते आ रहे हैं कि सब्र का फल मीठा होता है। लेकिन हम इसके वास्तविक मतलब को कभी नहीं समझ पाए। इंसान स्वभाव से ही बेसब्र होता है। वह बहुत जल्दी परिणाम चाहता है और जल्दी परिणाम के चक्कर में वह कई बार बहुत बड़ी गलतियां कर देता है। इसी से संबंधित एक छोटे से उदाहरण में मैं आपको एक ऐसे व्यक्ति के बारे में बताने जा रहा हूं, जिसने कुछ इसी तरह की गलती की।    

एक बार एक राकेश नाम का व्यक्ति था। उससे यह कहा गया कि उसके पास दो विकल्प है। या तो वह एक करोड़ रुपए अभी ले ले या फिर एक रुपया ले ले जो अगले 31 दिनों तक हर रोज दोगुना हो जाएगा। आपके अनुसार उसे क्या चुनना चाहिए। जाहिर सी बात है उसने एक करोड रुपए वाला पहला विकल्प चुना और अगर हम भी  राकेश की जगह होते तो शायद हम भी यही विकल्प चुनते हैं। क्योंकि इंसान ज्यादा दिमाग नहीं लगाता और उसे जो सबसे आसान और सीधा सीधा समझ में आ जाता है, वह उसे ही चुन लेता है।   

अब मैं आपको बताता हूं कि राकेश ने एक करोड रुपए वाला पहला विकल्प चुनकर कितनी बड़ी गलती कर दी। शायद आप यह सुनकर यह सोच रहे होंगे कि उसने गलती कैसे कर दी और आप शायद यह भी सोच रहे होंगे कि आखिर एक रुपया हर रोज दुगना हो भी जाता है तो 31 दिन में ज्यादा से ज्यादा एक या दो लाख रुपए हो जाएगा।

लेकिन आपकी जानकारी के लिए मैं आपको बता दूं कि वह एक रुपया हर रोज दुगना हो कर 31 दिन में एक अरब तीहतर करोड़ साठ लाख इकतालीस हजार आठ सौ चौबीस रुपए हो जाएंगे। सही में अब आप ही बताइए कि राकेश ने एक करोड रुपए का पहला विकल्प चुनकर कितनी बड़ी गलती कर दी।  

ओवरनाइट ( रातों रात ) कामयाबी जैसा कुछ भी नहीं होता । बल्कि कामयाब होने के लिए समय देना पड़ता है। शुरू में किए गए छोटे-छोटे कार्य ही बाद में एक कंपाउंडिंग इफेक्ट क्रिएट करते हैं। जिसके नतीजों को देख कर हम लोग हैरान रह जाते हैं। वारेन बफेट को कौन नहीं जानता दुनिया के तीसरे सबसे अमीर व्यक्ति रह चुके हैं। उन्हें बचपन में ही इन्वेस्टमेंट में कंपाउंडिंग इफेक्ट का पता चल गया था और तब से लेकर आज तक वह इस शक्ति का प्रयोग लगातार करते आ रहे हैं।  

वारेन बफेट ने अपना पहला निवेश तब किया था जब वे केवल 11 साल के थे। उन्होंने इस शक्ति को समझा और इसका बखूबी उपयोग भी किया और दुनिया के तीसरे अमीर व्यक्ति बने।  और उन्होंने यह सब केवल 22% के सालाना रिटर्न से हासिल किया है।   

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