पॉवर ऑफ़ कम्पाउंडिंग क्या है ? | Power Of Compounding In Hindi

“पॉवर ऑफ़ कंपाउंडिंग दुनिया का आठवां आश्चर्य है। जो इसे समझता है, वह इससे कमाता है; और वह जो इसे नहीं समझता, इसका भुगतान करता है। “

— ALBERT EINSTEIN

छोटी-छोटी बचतें, उनका सही जगह निवेश और पैसों का सही प्रबंधन, ये ऐसी कुछ छोटी-छोटी बातें हैं, जिन्हें हम हमेशा नजर अंदाज कर देते हैं। लेकिन यही छोटी-छोटी बातें अमीर बनने के लिए सबसे ज़्यादा मायने रखती है और नजर अंदाज करने की यह आदत हमारे लिए हमेशा नुकसानदायक बन जाती है। आज हम इन्हीं में से एक Power Of Compounding In Hindi विषय के बारे में पढ़ने जा रहे हैं।

Power of compounding in Hindi

Power Of Compounding In Hindi

‘Power of compounding’ क्या है ?

दोस्तों पॉवर ऑफ़ कम्पाउंडिंग ( Power of compounding in Hindi ) का सीधा सीधा मतलब यह है कि आपके इन्वेस्टमेंट पर मिलने वाला ब्याज ( return ) साल दर साल आपके मूल निवेश में जुड़ता रहता है, जिसकी वजह से आपकी मूल निवेशित राशि और साथ में उस निवेश राशि पर मिलने वाला ब्याज भी साल दर साल बढ़ता जाता है, जिसकी वजह से कम्पाउंडिंग इफ़ेक्ट से आपका पैसा बहुत तेजी से बढ़ता है। अगर हम कंपाउंडिंग का हिंदी मतलब देखे तो इसका मतलब चक्रवृद्धि होता है और हमें पता है कि चक्रवृद्धि ब्याज वह ब्याज होता है जहां हमें ब्याज पर भी ब्याज मिलता है।

इसको सही से समझने के लिए मैं आपको एक छोटा सा उदाहरण देता हूं। मान लीजिए हमारे पास किसी फल का एक ही पेड़ है। लेकिन हमें उस पेड़ से इसी तरह के और भी पेड़ चाहिए। तो हमें क्या करना होगा। हम उस पर लगने वाले फलों के बीजों को दोबारा से जमीन में लगा देंगे और हमें उसी तरह के और पेड़ मिल जाएंगे। अगर सालों साल यह प्रक्रिया चलती रहती है तो हम उसी तरह के जितने चाहे उतने पेड़ उगा सकते हैं। कंपाउंडिंग इफेक्ट भी बिल्कुल ऐसे ही काम करता है।

कंपाउंडिंग इफेक्ट में इतनी ही ताकत है कि यह हमारे निवेश को समय के साथ कई गुना बढ़ा देता है। जिस तरह से उस छोटे से बीज में हजारों लाखों पेड़ों का अस्तित्व छिपा हुआ होता है। उसी तरह से पैसों की एक छोटी सी राशि में भी लाखों करोड़ों रुपयों का अस्तित्व छिपा होता है। जिन्हें हम शुरुआत में देख ही नहीं पाते और इसी कारण हम उसे नजरअंदाज कर देते हैं और कभी पैसों का निवेश शुरू ही नहीं करते। क्योंकि हमें शुरुआत में वह छोटी सी राशि ही नजर आती है, लेकिन उसके अंदर छिपी अथाह दौलत को हम कभी देख ही नहीं पाते ।

‘Power of compounding’ कैसे काम करती है ?

निवेश में बहुत ताकत है। आप अपनी कमाई का बहुत छोटा हिस्सा निवेश करके भी अमीर व्यक्ति बन सकते हैं। लेकिन इंसान स्वभाव से बहुत बेसब्र होता है। वह चाहता है कि एकदम से कोई चमत्कार हो और वह रातों-रात ही अमीर व्यक्ति बन जाए। लेकिन हमें पता है कि ऐसा कुछ भी होने वाला नहीं है। अमीर बनने में समय लगता है। आप जितने भी अमीर व्यक्तियों को देख रहे हो तो वे सभी एक रात में ही अमीर नहीं बन गए। बल्कि उन्होंने उसके लिए लगातार कई सालों तक मेहनत की होती है। उन्होंने लगातार अपने समय और अपने पैसे का सही से निवेश किया हुआ होता है। जिसके कारण आज वे इतने अमीर व्यक्ति बन पाए है।

निवेश में इतनी ताकत होती है की अगर आप इसे सही से समझ लेते हैं। तो आपको अमीर बनने से कोई नहीं रोक सकता और जब निवेश की ताकत के साथ compound interest की ताक़त भी मिल जाती है, तो दोनों मिलकर ऐसे चमत्कार करते हैं जिनके परिणाम के बारे में सोच कर ही आप हैरान रह जाएंगे।

‘Power of compounding’ दुनिया का आठवाँ अजूबा है।

‘Power of compound interest के बारे में अल्बर्ट आइंस्टीन ने कहा है कि:-

“यह दुनिया का आठवां अजूबा है और जिसको इसकी समझ हो जाती है वह इससे पैसे कमाता है और जो इसे नहीं समझ पाता वह इसके लिए पैसे खर्च करता है।”

“Compound interest is the eighth wonder of the world. He who understands it earns it and he who doesn’t pay it.”

Power of compound interest को अल्बर्ट आइंस्टीन ने दुनिया का आठवां अजूबा क्यों कहा है। इसको सही से समझाने के लिए मैं आपको एक छोटी सी कहानी बताता हूं।

‘Power of compounding’ किंग स्टोरी इन हिंदी।

एक बार एक राजा के दरबार में दूसरे राज्य से एक कवि आया। राजा कवि की कविताओं से बहुत ज्यादा खुश हो जाता है। राजा कवि से इतना ज्यादा खुश हो जाता है कि वह कवि से कहता है कि जो तुम्हारा मन करे वह मांग सकते हो।

संयोगवश उस समय राजा शतरंज खेल रहे थे। कवि ने कुछ देर सोचा और फिर बोला कि महाराज मुझे ज्यादा कुछ नहीं चाहिए बस आप मुझे चावल के कुछ दाने ही दे दीजिए। लेकिन मेरी आपसे प्रार्थना है कि आप जो शतरंज खेल रहे हैं उसके खानों ( आपको पता होगा कि शतरंज के बोर्ड में 64 खाने होते है ) के हिसाब से ही मुझे चावल के दानें दे जैसे पहले खाने में सिर्फ एक चावल का दाना, दूसरे खाने में दो दाने, तीसरे में चार चावल के दाने और इसी तरह हर खाने के साथ उसे दोगुना कर दें।

कवि की यह अजीब सी माँग सुनकर राजा को गुस्सा आ गया और वह बोला कि जब मैं तुमसे कुछ भी मांगने के लिए कह रहा हूं तो तुम हीरे जवाहरात मांगने की बजाय कुछ चावल के दाने मांग रहे हो। तो कवि ने बड़ी विनम्रता से कहा कि महाराज आप मुझे बस कुछ चावल के दाने ही दे दीजिए। राजा ने अपने आदमियों को जिस तरह से वह कवि चावल के दाने मांग रहा था उसी तरह चावल के दाने गिन कर देने का आदेश दे दिया। राजा समेत दरबार में उपस्थित सभी व्यक्ति कवि को बहुत बड़ा बेवकूफ व्यक्ति मान रहे थे।

लेकिन कुछ समय बाद ही राजा के आदमी दौड़ते हुए आए और उन्होंने राजा को बताया कि महाराज वह कोई बेवकूफ आदमी नहीं है। बल्कि वह तो बहुत ही समझदार व्यक्ति है। जितने चावल के दाने वह मांग रहा है उतने चावल के दाने तो हमारे पूरे राज्य में भी नहीं है और यह सुनकर सभी हैरान रह जाते है ।

आखिर ऐसा कैसे संभव हो सकता है। इसको समझने के लिए हमें थोड़ी सी गणना करनी पड़ेगी। हमें पता है कि शतरंज के बोर्ड पर 64 खाने होते हैं। अब कवि के अनुसार पहले खाने में चावल का एक दाना है, तो उसके बाद हर खाने में चावल के दाने दोगुने होने थे।

यानी पहले खाने में एक, दूसरे में दो, तीसरे में चार, और चौथे में आठ और इसी तरह से आगे भी। अब हमें पता है कि -:
पहले खाने में 2⁰ = 1 दाना
दूसरे खाने में 2¹ = 2 दाने
तीसरे खाने में 2² = 4 दाने और
चौथे खाने में 2³ = 8 दाने

और इसी तरह से आगे भी।


और हमें आखिरी खाने में 2⁶³ दाने प्राप्त होते हैं। अगर हम इसकी थोड़ी और गणना करके देखें तो हमें लगभग 9223,372,036,854,775,808 चावल के दाने प्राप्त होते हैं। जिसे शायद हम गिन भी नहीं पाए। हम इस संख्या को 92,234×10¹⁴ भी लिख सकते है। अब इसको थोड़ा और आसान करने के लिए हम मान कर चलें तो 1 किलो चावल में लगभग 50000 दाने होते हैं। तो हमें अगर इन चावल के दानों का वजन निकालना पड़े तो


92,234×10¹⁴ ÷ 50000 = 1.85×10¹⁴ किलों वज़न प्राप्त होता है। अब अगर हम मान कर चलें तो लगभग 1 किलो चावल का मूल्य अगर ₹50 है तो ऊपर दिए गए चावल का कुल मूल्य निकालते हैं।
1.85×10¹⁴×50 =92.235×10¹⁴ रूपए। ऊपर हमें चावल का मूल्य रुपयों में प्राप्त हो गया है। जिसकी शायद हम अब भी गणना न कर पाए। इसको थोड़ा और आसान करने के लिए हम इस संख्या को डॉलर्स में निकालते हैं। हम डॉलर की कीमत अगर आज के हिसाब से लगभग ₹75 प्रति डॉलर लगा कर चले तो हम इस पूरी राशि को 75 से भाग दे देंगे और हमें यह संख्या डॉलर में प्राप्त हो जाएगी।
92.235×10¹⁴ ÷ 75 = 1.2295×10¹⁴

ऊपर दी गई राशि हमें डॉलर में प्राप्त हो गई है। अब हमें पता है कि 1 ट्रिलियन डॉलर में 10¹² होता है। तो हमें इसे ट्रिलियन डॉलर में हासिल करने के लिए ( 122.95×10¹² डॉलर ) लिख सकते हैं।

ऊपर दी गई राशि हमें ट्रिलियन डॉलर में प्राप्त हो गई है। और यह लगभग 123 ट्रिलियन डॉलर के बराबर हो जाती है। अगर हम पूरी दुनिया की जीडीपी की बात करें तो 2020 में पूरे विश्व की जीडीपी लगभग 138.35 ट्रिलियन डॉलर है यानि यह राशि पूरी दुनिया की जीडीपी से थोड़ा सा ही कम है।


इसे सुनकर आप चौंक गए होंगे और अब आपको वह कवि कोई बेवकूफ नजर नहीं आएगा। बल्कि वह तो बहुत ही समझदार व्यक्ति था जो पूरी दुनिया की दौलत मांग रहा था क्योंकि वह ‘Power of compound interest को जानता था।

The magic of compounding in Hindi

Power Of Compounding In Hindi

Power of compounding के चमत्कार।

अब आप निवेश में कंपाउंडिंग के महत्व को समझ गए होंगे। कंपाउंडिंग शुरुआत में धीरे-धीरे काम करती है और समय बढ़ने पर इसका परिणाम भी तेज होने लगत है और आखिर के सालों में तो इसके परिणाम इतने चौंकाने वाले होते हैं कि आप इन्हें देखकर हैरान रह जाएंगे। इसलिए जितना जल्दी हो सके आपको investment शुरू कर देनी चाहिए ताकि आपके पैसों को ‘Power of compound interest का लाभ मिल सके।

अगर आप छोटी उम्र में निवेश शुरू करते है, तो आप अपने पैसों को grow करने में ज्यादा समय दे सकते है और समय वह फैक्टर है जो आपके पैसों को ‘Power of compound interest से कई गुना अधिक तेजी से वृद्धि करने में सबसे अधिक महत्त्व रखता है। ‘Power of compound interest में समय के महत्त्व को समझने के लिए में आपको एक छोटा सा उदाहरण देता हूं।

मान लीजिए अगर आप अपने बच्चे के जन्म के समय से सिर्फ ₹1000 महीना किसी ऐसी जगह निवेश करते हैं। जहां आपको सिर्फ अपनी राशि पर 15% सालाना ब्याज मिलता रहे। तो आप जानकर हैरान रह जाएंगे कि यह ₹1000 प्रति महीने की राशि 15% के सालाना रिटर्न से बच्चे के 25 साल का होने तक 32.8 लाख रुपए हो जाएगी।

अगर अपना निवेश बच्चे की रिटायरमेंट की उम्र यानी 60 साल तक तक चालू रखते है तो यह राशि बच्चे के 60 साल का होने पर 62 करोड़ रुपए हो जाएगी।

हम यह कहावत बचपन से सुनते आ रहे हैं कि सब्र का फल मीठा होता है। लेकिन हम इसके वास्तविक मतलब को कभी समझ ही नही पाए। इंसान स्वभाव से ही बेसब्र होता है। वह बहुत जल्दी परिणाम चाहता है और जल्दी परिणाम के चक्कर में वह कई बार बहुत बड़ी गलतियां कर देता है। इसी से संबंधित एक छोटे से उदाहरण में मैं आपको एक ऐसे व्यक्ति के बारे में बताने जा रहा हूं, जिसने कुछ इसी तरह की गलती की।

‘Power of compound interest’ Story

एक बार एक राकेश नाम का व्यक्ति था। उससे यह कहा गया कि उसके पास दो विकल्प है या तो वह एक करोड़ रुपए ले ले या फिर एक रुपया ले ले जो अगले 31 दिनों तक हर रोज दोगुना हो जाएगा। आपके अनुसार उसे क्या चुनना चाहिए।

जाहिर सी बात है उसने एक करोड रुपए वाला पहला विकल्प चुना और अगर हम भी राकेश की जगह होते तो शायद हम भी यही विकल्प चुनते हैं। क्योंकि इंसान ज्यादा दिमाग नहीं लगाता और उसे जो सबसे आसान और सीधा सीधा समझ में आ जाता है, वह उसे ही चुन लेता है।

अब मैं आपको बताता हूं कि राकेश ने एक करोड रुपए वाला पहला विकल्प चुनकर कितनी बड़ी गलती कर दी। शायद आप यह सुनकर यह सोच रहे होंगे कि उसने गलती कैसे कर दी और आप शायद यह भी सोच रहे होंगे कि आखिर एक रुपया हर रोज दुगना हो भी जाता है तो 31 दिन में ज्यादा से ज्यादा एक या दो लाख रुपए हो जाएगा।

लेकिन आपकी जानकारी के लिए मैं आपको बता दूं कि वह एक रुपया हर रोज दुगना हो कर 31 दिन में एक अरब तीहतर करोड़ साठ लाख इकतालीस हजार आठ सौ चौबीस रुपए हो जाएंगे। सही में, अब आप ही बताइए कि राकेश ने एक करोड रुपए का पहला विकल्प चुनकर कितनी बड़ी गलती कर दी।

ओवरनाइट ( रातों रात ) कामयाबी जैसा कुछ भी नहीं होता । बल्कि कामयाब होने के लिए समय देना पड़ता है। शुरू में किए गए छोटे-छोटे कार्य ही बाद में एक कंपाउंडिंग इफेक्ट क्रिएट करते हैं। जिसके नतीजों को देख कर हम लोग हैरान रह जाते हैं।

वारेन बफेट को कौन नहीं जानता दुनिया के तीसरे सबसे अमीर व्यक्ति रह चुके हैं। उन्हें बचपन में ही निवेश में कंपाउंडिंग इफेक्ट ( The Compounding effect ) का पता चल गया था और तब से लेकर आज तक वह इस शक्ति का प्रयोग लगातार करते आ रहे हैं।

वारेन बफेट ने अपना पहला निवेश तब किया था जब वे केवल 11 साल के थे। उन्होंने इस शक्ति को समझा और इसका बखूबी उपयोग भी किया और दुनिया के तीसरे अमीर व्यक्ति बने और उन्होंने यह सब केवल 22% के सालाना रिटर्न से हासिल किया है।

Power of compound interest in Hindi

‘Power of compounding’ से लाभ कैसे उठाए।

अगर आप अपनी कमाई का केवल 10% बचाते है और उसे सही जगह निवेश करते हैं तो कुछ सालों बाद ही ‘Power of compound interest से आपका धन इतना हो जाएगा कि आप देखकर हैरान रह जाएंगे।

अपनी कमाई का 10% बचत करने की बात पर आप शायद यह कह सकते हैं कि हमारे खर्चे इतने ज्यादा है कि बचत के लिए हमारे पास पैसे बचते ही नहीं है या आप कह सकते हैं कि मेरी आमदनी कम है और निवेश के लिए मेरे पास पैसे नहीं है या ऐसे ही बहुत से कारण आप मुझे बता सकते हैं।

लेकिन मैं आपको ऐसे ही एक व्यक्ति के बारे में बताना चाहता हूं, जो बहुत ज्यादा कठिन परिस्थितियों से गुजरें। उनके द्वारा समय समय पर की गई छोटी-छोटी बचतों, अपने पैसों को सही जगह निवेश करके और ‘Power of compound interest को समझ कर वे एक अरबपति भी बने। मैं बात कर रहा हूं रिच डैड एंड पुअर डैड पुस्तक के लेखक रॉबर्ट कियोसाकी के बारे में।

रॉबर्ट की जिंदगी में एक समय ऐसा था जब उसे हर तरफ से केवल निराशा ही मिल रही थी। वह जो भी व्यवसाय करते थे उसी में उन्हें नुकसान होता था। इस तरह से उनके सिर पर कर्ज का बोझ भी बढ़ गया था। जिसके कारण उन्हें व उनकी पत्नी किम कियोसाकी को एक छोटी सी कंपनी में नौकरी करनी पड़ी। जहां उन्हें वेतन के रूप में बहुत कम पैसा मिलता था।

लेकिन उन्होंने अपनी अमीर बनने की इच्छा को कभी नहीं छोड़ा। वे अपनी सैलरी मिलते ही सबसे पहले इसका 10% अलग से निकाल लेते थे और उसे अच्छी जगह निवेश कर देते थे। और उसके बाद ही अपने बाकी के खर्चे करते थे।

चाहे कितनी भी कठिनाई हो लेकिन शुरुआत में ही अपनी सैलरी का 10% निवेश करने की आदत को उन्होंने कभी नहीं छोड़ा। उनकी इसी आदत के कारण ही उन्होंने एक दिन वित्तीय स्वतंत्रता हासिल की और एक अरबपति भी बने।

पैसों के मामले में इंसान की एक खास प्रवृत्ति है। वह अपनी आमदनी के हिसाब से अपने खर्चों का संयोजन कर लेता है। जो इस गुण के बारे में जानकारी नहीं रखते वे हमेशा इससे नुकसान उठाते हैं और जो इसको समझते हैं वे इसका हमेशा फायदा उठाते हैं।

अगर हम भी इस खास गुण का फायदा उठाना चाहे तो हमें सबसे पहले यह करना होगा कि हमारे पास जब भी कमाई के रूप में पैसा आता है तो सबसे पहले बिना किसी भी प्रकार का खर्च किए उसका कम से कम 10% और अगर हो सके तो इससे ज्यादा भी अलग से निकाल ले और उन्हें किसी अच्छी जगह निवेश कर दें।

उसके बाद ही अपने अन्य खर्चे करें। जब हम ऐसा करते हैं तो हमारे दिमाग को यह संकेत मिल जाता है कि हमें बाकी का पूरा महीना उन्हीं बचे हुए पैसों में निकालना है। इस तरह हमारा दिमाग अपने आप हमारे खर्चों का संयोजन कर देता है और हमारा पूरा महीना बिना किसी परेशानी के निकल जाता है।

जब आप इस तरह अपनी कमाई का एक छोटा सा हिस्सा निकालकर उसे निवेश करते रहेंगे तो आप एक दिन देखेंगे कि आपके पैसों का यह छोटा सा पेड़ एक दिन बहुत बड़ा वृक्ष बन गया है और इस वृक्ष के नीचे व आसपास और भी बहुत सारे छोटे-छोटे पैसों के पोधें उग आए हैं। जो एक दिन बड़े हो जाएंगे और आप उस दिन एक दौलतमंद व्यक्ति बन जाएंगे।

मैंने अपने इस ब्लॉग ‘Power of compounding in Hindi‘ में कई जगह छोटी-छोटी बचत और उनको सही जगह निवेश करने के बारे में बताया है। आप शायद इसे पढ़कर यह सोचे कि सही जगह निवेश से मेरा क्या मतलब है। तो इसके लिए आप मेरा ब्लॉग ‘अपने बचत के पैसे को सही जगह कैसे निवेश करें और 2020 में निवेश के 10 सबसे कारगर तरीके कौन से हैं‘ पढ़ सकते है।’

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