निक वुजीसिक की जीवनी | Nick Vujicic Life Story In Hindi

अगर आप कुछ ऐसा पाना चाहते हैं जो आपने पहले कभी नहीं पाया,तो आपको उसके लिए कुछ ऐसा करना पड़ेगा जो आपने पहले कभी नहीं किया।

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दोस्तों यह Nick Vujicic Life story in Hindi एक ऐसे व्यक्ति के बारे में है जिनके बचपन से ही दोनों हाथ और दोनों पैर नहीं है। लेकिन बिना हाथ पैरों के होते हुए भी उन्होंने दुनिया में नाम कमाया है।

दोस्तों ऑस्ट्रेलिया के निक वुजिसिक के जीवन पर आधारित यह प्रेरणादायक जीवनी आपके जीवन व सोचने के नजरिये को बदल सकती है। आप चाहे महिला है या पुरुष, यह inspirational story in Hindi आपके लिए एक Life Changing Story साबित हो सकती है।

आपको Nick Vujicic की इस Short success story in Hindi से बहुत कुछ सीखने को मिलेगा और आप अपनी जिन्दगी के प्रति Motivate व inspire हो जाओगे।

Nick Vujicic Life Story In Hindi

Nick Vujicic’s Life story in Hindi

निक वुजीसिक की विकलांगता से जंग और जीत की प्रेरक कहानी

निक वुजीसिक के बारे में | About Nick Vujicic

  • Name – निक वुजीसिक
  • Nick Vujicic Citizenship – ऑस्ट्रेलिया।
  • When Nick Vujicic Born – 4 दिसंबर 1982.
  • Nick Vujicic Place of Birth – ऑस्ट्रेलिया के मेलबर्न में।
  • Nick Vujicic Why Known – मोटिवेशनल स्पीकर।
  • Nick Vujicic Wife – Kanae Miyahara.
  • Nick Vujicic Children – चार बच्चे।
  • Nick Vujicic Networth – $500 Thousand (according to Forbes data dated 18/11/2020)
  • Nick Vujicic Age – 37 वर्ष (as of 4 December 2020)

अपंगता से जंग और जीत की मोटिवेशनल कहानी इन हिंदी।

दुनिया में ऐसे बहुत से लोग हैं जो बचपन से ही किसी बीमारी या अन्य कारण से अपंग पैदा हुए हैं। इनमें से कुछ बिना हाथ पैर के या कुछ बिना बोलने या सुनने की क्षमता के यानी गूंगे या बहरे या कुछ बिना आंखों की रोशनी के यानी अंधे पैदा हुए होते हैं। इसलिए लोग उन्हें अपंग कह कर बुलाते हैं।

इस संज्ञा को सुनते सुनते जब वह बड़े होते हैं तो उन्हें लगता है कि वह दूसरों जैसे नहीं है, क्योंकि वे दूसरों की तरह चल फिर नहीं सकते या दूसरों की तरह देख नहीं सकते, सुन नहीं सकते या फिर बोल नहीं सकते हैं। उन्हें लगता है कि भगवान ने उन्हें पिछले जन्म के किसी पाप की सजा दी है, इसलिए उन्हें ऐसा बनाया है। इन बातों के कारण उनके मन में नकारात्मकता आ जाती है और वे अपने आपको दूसरों से हीन मानने लग जाते हैं।

जबकि दूसरी तरफ दुनिया में कुछ लोग ऐसे भी हैं, जिन्होंने पूरी तरह से अपंग होते हुए भी दुनिया में नाम कमाया है। जिन्होंने अपंगता को अपनी कमजोरी न समझ कर उसे अपने शक्ति समझा और सामान्य लोगों की तरह ही जीवन जिया है।

बचपन से ही थे एक अजीब तरह की बीमारी से ग्रस्त।

आज मैं आपको एक ऐसे व्यक्ति के बारे में बताने जा रहा हूं, जिन्होंने अपनी अपंगता पर विजय हासिल की और वे आज उनकी तरह के दूसरे लोगों को भी जीवन जीने की नई राह दिखा रहे हैं। वे एक मोटिवेशनल स्पीकर हैं और उन जैसे दूसरे लोग, जो जीवन की परेशानियों से हर मान कर बैठ गए है, के मन में जीवन के प्रति एक नई उमंग व एक नया उत्साह भरते हैं।  

मैं बात कर रहा हूं ऑस्ट्रेलिया के निक वुजीसिक की। निक वुजीसिक का जन्म ऑस्ट्रेलिया के मेलबर्न में 1982 में हुआ था। बचपन से ही निक एक बीमारी ट्रेटा अमेलिया सिंड्रोम के कारण बिना हाथ व पैर के पैदा हुए थे। कहते हैं कि पूरी दुनिया में इस बीमारी से ग्रसित केवल 7 लोग ही जीवित हैं।  

बचपन में हमेशा यही सोचते रहते थे की मैं ऐसा क्यों हूँ ?

जब निक वुजीसिक का जन्म हुआ तो उनके माता-पिता ने उन्हें बिना हाथ पैर के देखकर लेने से भी मना कर दिया था। लेकिन बाद में यह सोच कर कि शायद भगवान की यही मर्जी है उन्होंने निक वुजीसिक को इसी हालत में स्वीकार कर लिया।

निक के माता पिता ने उन्हें बहुत सारे डॉक्टर को भी दिखाया। लेकिन कोई भी डॉक्टर उनके इस विकार को ठीक नहीं कर पाया। निक का बचपन बहुत परेशानियों से गुजरा।

जब निक बड़ा हो रहा था तो वह हमेशा यही सोचते रहता था कि, मैं ऐसा क्यों हूं! मैं दूसरे बच्चों की तरह चल फिर क्यों नहीं सकता, मैं दूसरों बच्चों की तरह खेल क्यों नहीं सकता। स्कूल में बच्चे उनका मजाक उड़ाते थे।

इन सब कारणों से वे हीन भावना से ग्रस्त हो गए और हमेशा ही अकेले बैठे कुछ सोचते रहते थे। इन सभी परेशानियों से हार मानकर उन्हें एक दिन आत्महत्या करने का मन बना लिया और वे पानी से भरे एक बड़े से टब में कूद गए। लेकिन उन्हें बचा लिया गया।

मिला जीवन जीने का अलग नजरिया।

जब उनके माता-पिता को उनकी आत्महत्या करने के कारण का पता चला तो उनकी मां ने उन्हें एक लेख पढ़ने को दिया जो एक समाचार पत्र में छपा था। यह एक विकलांग व्यक्ति की विकलांगता से जंग और जीत की कहानी थी।

यह लेख पढ़कर निक वुजीसिक का जीवन के प्रति नजरिया ही बदल गया। उन्हें पता चला कि वे दुनिया में इस तरह के अकेले व्यक्ति नहीं है, बल्कि दुनिया में इस तरह के और भी हजारों लाखों व्यक्ति होंगे जो इसी तरह के हालातों में जीवन जीने जीने को मजबूर होंगे और अपने हालातों से हार मान कर बैठ गए होंगे।

उसी दिन से निक वुजीसिक ने अपनी तरह के अन्य लोगों के लिए एक प्रेरणा स्रोत बनने का फैसला कर लिया और उनके जीवन में एक नई उमंग व एक नया उत्साह भर कर उनकी जीवन के प्रति एक सकारात्मक सोच पैदा करने का फैसला किया। तब से ही वे पूरी दुनिया में घूम घूम कर ऐसे लोगों को प्रेरित करने का काम कर रहे हैं।

निक वुजीसिक बने दुनिआ के लिए प्रेरणा।

निक वुजीसिक ने अपना पहला भाषण 19 साल की उम्र में दिया था। हालांकि निक वुजीसिक ने प्रेरित करने का यह कार्य अपने जैसे अपंग लोगों के लिए शुरू किया था। लेकिन आज पूरी दुनिया में उनके करोड़ों समर्थक हैं, जिनमें से करोड़ों की संख्या में सामान्य लोग हैं जो उन्हें देखकर प्रेरणा हासिल करते हैं।

निक वुजीसिक एक गैर लाभकारी संस्था लाइफ विदाउट लिमिट्स के अध्यक्ष हैं, जिसकी स्थापना 2005 में की गई थी। उनकी उपलब्धियों के लिए 1990 में ऑस्ट्रेलिया सरकार द्वारा उन्हें ऑस्ट्रेलियन यंग सिटीजन अवार्ड से सम्मानित किया गया था। 2005 में यंग ऑस्ट्रेलियन ऑफ द ईयर पुरस्कार के लिए भी उनके नाम का प्रस्ताव किया गया था।

 निक वुजीसिक आज एक सामान्य व्यक्ति की तरह जीवन जी रहे हैं। वह सब कर सकते हैं जो एक सामान्य व्यक्ति कर सकता है। वे फुटबॉल खेलते हैं, गोल्फ खेलते है। वह एक अच्छे तैराक है और समुंदर की लहरों पर आप उन्हें सर्फिंग करते हुए देख सकते हैं।

वे एक अच्छे स्काई ड्राइवर हैं, और आसमान की ऊंचाइयों में स्काईडाइविंग का मजा लेते हुए आप उनके कई वीडियोस देख सकते हैं। इसके अलावा वे एक अच्छे पेंटर भी हैं। निक वुजीसिक अपने दैनिक जीवन के कार्यों के लिए किसी भी प्रकार से किसी अन्य व्यक्ति पर निर्भर नहीं है। वे अपने दैनिक कार्य खुद करते हैं। वह अपने पैर की उंगलियों से लिख सकते हैं, कंप्यूटर पर टाइप कर सकते हैं तथा मोबाइल फोन चला सकते हैं।इनके अलावा वे अपने पैर से ही बहुत अच्छा ड्रम भी बजा सकते हैं।

लोगों को प्रेरित करने के लिए लिख चुके है कई किताबें।

निक वुजीसिक ऑस्ट्रेलिया के ग्रिफिथ विश्वविद्यालय से लेखा व वित्त के स्नातक हैं। वह एक बहुत अच्छे लेखक भी हैं और प्रेरक विषयों पर पुस्तके लिखते हैं। उनकी पहली पुस्तक लाइफ विदाउट लिमिट्स: इंस्पिरेशन फॉर ए रिडिक्यूल गुड लाइफ का प्रकाशन 2010 में हुआ था। इस पुस्तक का अनुवाद अब तक दुनिया की लगभग 30 भाषाओं में हो चुका है।इसके अलावा भी उन्होंने बहुत सी किताबें लिखी है। उनके द्वारा लिखी कुछ प्रमुख किताबें हैं।

Nick Vujicic की Books

निक वुजीसिक की फैमिली | Nick Vujicic’s Family

2012 में निक वुजीसिक की शादी Kanae Miyahara से हुई थी। अब उन दोनों के चार बच्चे हैं और निक कैलिफोर्निया में अपने परिवार के साथ एक सुखी जीवन व्यतीत कर रहा है।

निक वुजीसिक का YouTube Channel Link –

https://www.youtube.com/channel/UCm71Z36uSgQtoNmnYjelvNA

इस सच्ची कहानी से हमें क्या सीख मिलती हैं ?

एक तरफ जहां निक वुजीसिक शारीरिक अक्षमता से जूझते हुए भी एक सुखी व उत्साह पूर्वक जीवन व्यतीत कर रहे हैं और जीवन की हर समस्या का सामना हंसते हुए कर रहे हैं। जबकि दूसरी तरफ हम हैं जो एक सामान्य शरीर के साथ पैदा हुए हैं और जीवन की छोटी-छोटी समस्याओं से घबराकर हार मान कर बैठ जाते हैं।

जबकि यह छोटी-छोटी समस्याएं ही हमारे लिए वह रास्ता है जिनका सामना करते हुए हम कामयाबी हासिल कर सकते हैं। हमारे जीवन में जब कभी कोई समस्या आती है तो सबसे पहले हम यह सोचते हैं कि यह मेरे साथ ही क्यों होता है और दुनिया के दूसरे व्यक्तियों के साथ ऐसा क्यों नहीं होता।

जबकि ऐसा कुछ भी नहीं है। समस्याएं हर व्यक्ति के जीवन में आती है। निक वुजीसिक जैसे महान लोग तो अपनी समस्याओं से लड़कर, उन पर विजय पा लेते है। लेकिन हम जैसे लोग यह मानकर कि यह समस्या सिर्फ मेरी जिंदगी में ही है। घोर निराशा के शिकार हो जाते हैं और जिंदगी हमें बोझ लगने लगती है और जिंदगी से हार मान कर कोई गलत कदम उठा लेते हैं।

जबकि हमें यह मानने की जरूरत है कि समस्याएं अस्थाई है और यह आती जाती रहती। निक वुजीसिक जैसे व्यक्ति इन छोटी-छोटी समस्याओं का सामना कर यह साबित कर देते हैं कि असंभव कुछ भी नहीं है। प्रयास करने पर सब कुछ संभव हो जाता है।

सभी के जीवन में ऐसी छोटी-छोटी समस्याएं आती रहती है, ऐसे में हमें खुद पर भरोसा रखने की जरूरत है। इन समस्याओं का मुकाबला पूरी ताकत से करने की जरूरत है, जब तक हम इन पर विजय हासिल न कर ले। अगर आप यह सोचते हैं कि यह असम्भव है, तो विश्वास मानिए कि “ जिंदगी में असंभव कुछ भी नहीं है “।

Nick Vujicic Life Story In Hindi

मोती कभी भी किनारे पे खुद नहीं आते, उन्हें पाने के लिए समुन्दर में उतरना ही पड़ता है।

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ताकि जो लोग जीवन में कुछ करना चाहते है, कुछ बनना चाहते। लेकिन जीवन की मुसीबतों के कारण हार मान कर बैठ गए है वे इस Nick Vujicic’s Life story in Hindi से inspire हो सके, motivate हो सके।

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