जहाँ चाह वहाँ राह | Motivational Story In Hindi

“अधिकतर महान लोगों ने अपनी सबसे बड़ी सफलता अपनी सबसे बड़ी विफलता के एक कदम आगे हासिल की है। “

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दोस्तों ‘Think and Grow Rich’ के लेखक Napoleon Hill की बेस्टसेलिंग बुक पर आधारित यह Motivational story in Hindi आपके जीवन व सोचने के नजरिये को बदल सकती है।

दोस्तों इस प्रेरक कहानी में आप एक ऐसे व्यक्ति के बारे में पढ़ेंगे, जिन्होंने अपनी इच्छाशक्ति के दम पर अपने सपने को पूरा किया। आप चाहे महिला है या पुरुष, यह Motivational Story in Hindi आपके लिए एक Life Changing Story साबित हो सकती है।

आपको इस Motivational Story in Hindi से बहुत कुछ सीखने को मिलेगा और आप अपनी जिन्दगी के प्रति Motivate व Inspired हो जाओगे।

A Best motivational story in Hindi

A Best Motivational Story In Hindi

“जहाँ चाह वहाँ राह” एक प्रेरणादायक सच्ची कहानी।

विचार दुनिया की सबसे शक्तिशाली वस्तु है।” और यह बिल्कुल सच है। आपके विचार भौतिक वस्तु बन जाते हैं, लेकिन यह तभी संभव है जब आपके विचारों के साथ एक निश्चित लक्ष्य हो, लगन हो और उन विचारों के जरिए धन – दौलत, शोहरत या किसी दूसरी भौतिक वस्तु को हासिल करने की प्रबल इच्छा जुड़ी हो। 

इस बुक ‘Think and Grow Rich‘ के लेखक Napoleon Hill के अनुसार जब दौलत आती है तो इतनी तेजी से और इतनी ज्यादा मात्रा में आती है कि व्यक्ति हैरान हो जाता है कि उसके गरीबी के दिनों में यह कहां छिपी हुई थी। आपको यह सुनकर थोड़ा अजीब लग सकता है। क्योंकि ऊपर कही गई बात इंसान के उस विश्वास के विरुद्ध है, जिसके अनुसार वह मानता है कि धन-दौलत और पैसा सिर्फ उन्हीं को मिलता है जो इसके लिए कठोर मेहनत करते हैं। लेकिन ऐसा नहीं है।

जब आपके अंदर धन दौलत, शोहरत या किसी अन्य चीज को हासिल करने की प्रबल इच्छा जागृत हो जाती है और इस तरह आप सोचकर अमीर बनने की शुरुआत करते हैं। जब आप ऐसा करते हैं, तो आप पाएंगे कि आपने दौलत हासिल करने की उस मानसिक अवस्था को हासिल कर लिया हैं और आपके पास दौलत बड़ी तेजी से और बड़ी मात्रा में आना शुरू हो जाती है। चाहे फिर आपने उसके लिए कड़ी मेहनत की हो या ना की हो। 

लेकिन इंसान की एक खास और लोकप्रिय आदत है कि वह ‘ यह कैसे संभव है ‘ इन शब्दों का प्रयोग बहुत करता है। वह ऐसे सारे काम जानता है जिन्हें करना असंभव है। वह हर उस चीज पर विश्वास करने से मना कर देता है जो उसके ज्ञान की सीमाओं से परे हो। वह हर वस्तु और हर व्यक्ति को अपने ज्ञान के पैमाने से नापता है। लेकिन हम मूर्खतापूर्वक यह मान बैठते हैं कि हमारा ज्ञान ही अन्य व्यक्तियों व वस्तुओं को नापने का सही पैमाना है।

जबकि दूसरी तरफ यह बात बिलकुल सही है कि जिस चीज पर हम विश्वास कर सकते हैं उसे हासिल भी कर सकते हैं। नेपोलियन हिल की बेस्टसेलिंग बुक ‘Think and Grow Rich’ से संबंधित एक छोटी सी सच्ची घटना मैं आपको बताना चाहता हूं जिसमें एडविन नाम के एक व्यक्ति ने अमीर बनने के बारे में सोचा और अमीर बनने की अपनी प्रबल इच्छा व विश्वास के दम पर वह एक दिन अमीर व्यक्ति बने भी।

दरअसल इस घटना की शुरुआत तब होती है जब एडविन ने यह जाना कि कैसे कोई व्यक्ति सिर्फ सोच कर ही अमीर बन सकता है। लेकिन शुरुआत में उन्होंने अमीर बनने के बारे में बिल्कुल भी नहीं सोचा था। वह तो बस महान थॉमस अल्वा एडिसन के बिजनेस पार्टनर बनना चाहते थे। शायद थॉमस अल्वा एडिसन के बिजनेस पार्टनर बनने की बात से आप यह अनुमान लगा रहे हो होंगे की एडविन नाम का यह व्यक्ति कोई बहुत बड़ा पैसे वाला व्यक्ति होगा।

लेकिन ऐसा बिल्कुल नहीं था। बल्कि जब एडविन के मन में थॉमस अल्वा एडिसन का पार्टनर बनने की इच्छा जगी तो उस समय वह महान थॉमस अल्वा एडिसन को जानता भी नहीं था और ना ही उसके पास इतने पैसे थे कि वह थॉमस अल्वा एडिसन से जाकर मिल सके। उसके पास रेल के भाड़े तक के पैसे नहीं थे।

किसी के लिए भी यह एक बहुत बड़ी बाधा हो सकती है और यह बाधा किसी का भी हौसला पस्त कर सकती है। लेकिन एडविन की इच्छा कोई साधारण इच्छा नहीं थी। उसने तो अपने मन में यह ठान लिया था कि उसे हर हालत में थॉमस अल्वा एडिसन का बिजनेस पार्टनर बनना है। उसकी इस प्रबल इच्छा ने उसके लिए थॉमस अल्वा एडिसन तक पहुंचने का रास्ता निकाल दिया और वह एक मालगाड़ी में बैठकर थॉमस अल्वा एडिसन के पास ऑरेंज, न्यू जर्सी पहुंच जाता है।

वह मिस्टर एडिशन की प्रयोगशाला में पहुंचकर वहां काम कर रहे कर्मचारियों से अपना परिचय थॉमस अल्वा एडिसन के पार्टनर के रूप में करवाता है। यह सुनकर सभी उसका मजाक उड़ाते हैं। क्योंकि उसे देखकर वे यह यकीन नहीं कर पा रहे थे कि मैले से कपड़े पहने यह व्यक्ति महान थॉमस अल्वा एडिसन का बिजनेस पार्टनर कैसे हो सकता है। जब मिस्टर थॉमस अल्वा एडिसन उससे मिले तो वह उनके सामने एक फुटपाथिए की तरह खड़ा था। लेकिन थॉमस अल्वा एडिसन ने उसके चेहरे के उस भाव को पढ़ लिया था जिसमें उसने अपने लक्ष्य को हासिल करने का दृढ़ निश्चय कर रखा था। 

 मिस्टर थॉमस अल्वा एडिसन ने अपने वर्षों के अनुभव से यह सब जाना था कि जब कोई व्यक्ति किसी चीज को इतनी बुरी तरह से पाना चाहता है कि वह उसे पाने के लिए अपना पूरा जीवन दांव पर लगा दे तो उसका जीतना तय है। हालांकि मिस्टर थॉमस अल्वा एडिसन ने उसे पहली ही मुलाकात में अपना बिजनेस पार्टनर नहीं बना लिया था। बल्कि शुरुआत में उसे बहुत कम वेतन पर अपने ऑफिस में नौकरी पर रख लिया।

कई महीने गुजर गए लेकिन एडविन की प्रबल इच्छा ने अभी तक मूर्त रूप नहीं लिया था। वे महीनों तक ऐसे ही बहुत कम वेतन पर काम करते रहे। लेकिन साथ ही वे मिस्टर थॉमस अल्वा एडिसन का बिजनेस पार्टनर बनने की अपनी इच्छा को लगातार और प्रबल करते जा रहे थे।

उन्होंने अपने आप से कभी भी यह नहीं कहा कि ” क्या फायदा, कितने महीने हो गए। अभी तक कुछ नहीं हुआ, तो आगे भी क्या होगा। ” बल्कि इसकी बजाय वे लगातार हर रोज अपने आप से यही कहते कि ” मैं यहां थॉमस अल्वा एडिसन का बिजनेस पार्टनर बनने आया हूं और मैं अपने इस लक्ष्य को हासिल करके ही रहूंगा। चाहे इसके लिए मुझे अपनी सारी जिंदगी दांव पर लगानी पड़े।

वे अपने लक्ष्य के प्रति पूरी तरह से गंभीर थे। जब कोई व्यक्ति किसी चीज के लिए सचमुच तैयार होता है तो वह चीज आखिरकार उसे मिल ही जाती है। अगर कोई भी व्यक्ति अपने लक्ष्य को निश्चित कर ले और संपूर्ण एकाग्रता व समर्पण के साथ उसे हासिल करने में जुट जाए, तो उसकी जीत तय है। आखिरकार एडविन को वह अवसर मिल ही गया जिसकी उसे तलाश थी। लेकिन यह अवसर उसके जीवन में कुछ इस तरह से आया जिसकी उसने कभी उम्मीद भी नहीं की थी।

वास्तव में सफलता बड़ी शातिर है और यह असफलता के पीछे छुप कर आती है। जिसकी वजह से अधिकतर व्यक्ति इसे पहचान नहीं पाते। वे असफलता को देखकर ही हार मान कर बैठ जाते हैं और उसके पीछे छिपी सफलता को वे देख ही नहीं पाते।  एडविन के साथ भी ऐसा ही हुआ। लेकिन उसने असफलता के वेश में छिपे अवसर को पहचान लिया था, जो पिछले दरवाजे से चुपचाप से आ गया था।

दरअसल मिस्टर थॉमस अल्वा एडिसन ने एक ऑफिस यंत्र बनाया था जिसे उस समय एडिसन डिक्टेटिंग मशीन के नाम से जाना जाता था। लेकिन कोई भी सेल्समैन उस मशीन को बेचने के लिए तैयार नहीं था। क्योंकि सभी सेल्समैन को ऐसा विश्वास था कि उस अजीब सी दिखने वाली मशीन को कोई नहीं खरीदेगा। 

इस मशीन के आविष्कार में थॉमस अल्वा एडिसन का काफी पैसा लगा था। एडविन यह जानता था कि वह इस मशीन को आसानी से बेच सकता है। उसने मिस्टर थॉमस अल्वा एडिसन के सामने इसको बेचने का प्रस्ताव रखा और उसे वह मौका मिल गया। उसने वह मशीन इतनी आसानी और सफलतापूर्वक बेची कि मिस्टर थॉमस अल्वा एडिसन ने उसे इस मशीन को पूरे देश में डिस्ट्रीब्यूटर करने व इसकी मार्केटिंग करने का कॉन्ट्रैक्ट दे दिया और इस तरह से थॉमस अल्वा एडिसन का पार्टनर बनने की उनकी प्रबल इच्छा ने मूर्त रूप ले लिया।

इस बिजनेस पार्टनरशिप के तहत एडविन ने ढेर सारी दौलत कमाई, लेकिन इससे भी ज्यादा उन्होंने अपनी प्रबल इच्छा के दम पर यह साबित कर दिया कि कैसे कोई इंसान सोचकर अमीर बन सकता है।

हालांकि एडविन शुरुआत में कुछ नहीं जानते थे। वह बस एक बात जानते थे कि वास्तव में उन्हें क्या हासिल करना है। उन्होंने एक बात ठान ली थी कि वे अपनी मनचाही चीज को हासिल होने तक डटे रहेंगे। यह बात उन्होंने दिल से सोची थी और उनकी प्रबल इच्छा ने उन्हें वह सब हासिल करा दिया, जो वे चाहते थे।   मैंने आपको ये सभी बातें महान लेखक मिस्टर नेपोलियन हिल की बेस्टसेलिंग बुक ‘Think and Grow Rich’ से आपको बताई है।

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ताकि जो लोग जीवन में कुछ करना चाहते है, कुछ बनना चाहते। लेकिन जीवन की मुसीबतों के कारण हार मान कर बैठ गए है वे इस ‘ A Best Motivational Story In Hindi‘ से Inspire हो सके, Motivate हो सके।

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