जीवन में परिश्रम का महत्व | Importance Of Hard Work In Hindi

एक  सपना तब तक जादू से  हकीकत  नहीं  बन  सकता,

जब तक इसमें  पसीना, दृढ  संकल्प और  कड़ी  मेहनत ना लगी हो।

— anonymous

दोस्तों यह ब्लॉग ‘परिश्रम का हमारे जीवन में क्या महत्व है’ ( IMPORTANCE OF HARD WORK IN HINDI ) आपके शैक्षिक उद्देश्य को तो पूरा करेगा ही इसके अलावा यह ब्लॉग आपको जीवन में परिश्रम करने के लिए भी प्रेरित करेगा। इसलिए आपसे मेरी एक प्रार्थना है की इस ब्लॉग को आप सिर्फ शैक्षिक उद्देश्य के लिए ही उपयोग न करें बल्कि इससे कुछ सीख लें। इसकी सीख आपको पूरी उम्र काम आने वाली है।

Importance Of Hard Work In Hindi

जीवन में परिश्रम का महत्व | IMPORTANCE OF HARD WORK IN HINDI

परिश्रम का महत्व भूमिका | Importance of hard work

कर्म ही जीवन है और बिना कर्म जीवन पशु के समान है। कर्म यानी काम। दैनिक जीवन में होने वाली गतिविधियों और जीवन यापन के लिए कर्म करना अत्यंत आवश्यक है। कर्म के अभाव में जीवन की कल्पना करना भी असंभव है। हर कर्म का आधार है परिश्रम यानी मेहनत। हर छोटे काम को करने के लिए कुछ ना कुछ मेहनत तो करनी ही पड़ती है। यहां तक कि आपको अपने आगे रखे खाने को खाने के लिए भी मेहनत करनी पड़ती है। 

प्राचीन काल से ही हमारे ऋषि-मुनियों ने श्रम के महत्व पर जोर दिया है और हमारे प्राचीन ग्रंथों में श्रम के महत्व पर विस्तार से लिखा गया है। केवल हमारे प्राचीन ग्रंथों में ही नहीं, बल्कि विश्व साहित्य की किसी भी किताब को उठाकर देखेंगे तो हमें परिश्रम के महत्व की झलक मिल ही जाएगी।

दुनिया की किसी व्यक्ति को अगर सफलता प्राप्त करनी है तो उसके लिए परिश्रम करना अनिवार्य है। परिश्रम वह एकमात्र हथियार है जो हर चीज के पार जाता है। किसी महान व्यक्ति ने कहा भी है कि ‘परिश्रम ही सफलता की कुंजी है‘ जो लोग मेहनत करते हैं वे एक न एक दिन सफल हो ही जाते हैं। सफलता प्राप्ति के लिए आपको खुद को मेहनत की आग में तपाना पड़ता है। परिश्रम की आग में तप कर व्यक्ति सोने की तरह चमकदार हो जाता है।

मेहनती व्यक्ति हमेशा अपने लक्ष्य की ओर अग्रसर रहता है। अपने लक्ष्य प्राप्ति के रास्ते पर चलते हुए परिश्रमी व्यक्ति मार्ग में आने वाली सभी मुसीबतों का सामना धैर्य से करता है और इन छोटी-छोटी बाधाओं को पार करके अपनी मंजिल तक पहुंच जाता है। हमारे प्राचीन ग्रंथों में कहा गया है कि ‘उद्यमेन ही सिध्यंति कार्याणि ना मनोरथे‘ अर्थात किसी भी कार्य की सिद्धि इच्छा करने से नहीं बल्कि परिश्रम करने से होती है।

परिश्रम के विभिन्न रूप | Different forms of hard work

श्रम यानी परिश्रम दो तरह का होता है शारीरिक श्रम और मानसिक श्रम।

शारीरिक श्रम से अभिप्राय उस श्रम से है जिसमें हम अपने शरीर से कोई काम करते हैं जैसे वजन उठाना, भागना, दौड़ना आदि। जबकि मानसिक श्रम का अभिप्राय उस श्रम से है जिसमें हम अपने दिमाग से कोई काम करते हैं जैसे कैलकुलेशन करना, निर्णय लेना, पढ़ना आदि। दोनों ही श्रम का अपना-अपना महत्व है। एक तरफ जहां फैक्ट्रियों और कारखानों में काम करने वाले मजदूरों को शारीरिक श्रम करना पड़ता है। वहीं डॉक्टरों, शिक्षकों, वकीलों व वैज्ञानिकों को मानसिक श्रम करना पड़ता है।

शारीरिक श्रम का महत्व | Importance of physical hard work

हमारे शारीरिक स्वास्थ्य के लिए परिश्रम करना बहुत आवश्यक है। बिना शारीरिक परिश्रम किए हमारा शरीर आलसी और कमजोर हो जाता है, बिना परिश्रम के हमारा शरीर अकर्मण्य हो जाता है और हमारी रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होने लगती है। जिसकी वजह से हमें बीमारियां होने का खतरा बढ़ जाता है। 

जबकि शारीरिक श्रम करने से हमारा शरीर मजबूत बनता है। हमारी रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होती है। हमारी रोग प्रतिरोधक क्षमता जितनी मजबूत होगी बीमारियों से लड़ने की हमारी क्षमता उतनी ही मजबूत होगी और बीमारियां होने का खतरा उतना ही कम होगा। शारीरिक परिश्रम करने के बाद हमारा शरीर थक जाता है जिसकी वजह से हमें भूख लगती है और नींद भी अच्छी आती है। नींद के दौरान हमारा शरीर नई कोशिकाओं का निर्माण करता है, जिससे हमारा शरीर तेजी से विकास करता है।

मानसिक श्रम का महत्व | Importance of mental hard work

मानसिक श्रम का भी उतना ही महत्व है जितना कि शारीरिक श्रम का। लोग परिश्रम का अर्थ केवल शारीरिक श्रम को ही समझते हैं, जबकि यह सच नहीं है। शरीर जितना शारीरिक श्रम से थकता है उतना ही मानसिक श्रम से भी थक जाता है। एक तरफ जहां शारीरिक श्रम करने से आपका शरीर मजबूत होता है वहीं दूसरी तरफ मानसिक श्रम करने से आपका दिमाग मजबूत होता है। जब हमारा दिमाग मजबूत होता है तो हम ऐसे निर्णय जिनमें ज्यादा दिमाग लगाने की आवश्यकता है जल्दी और सही से ले पाते हैं, हमें चीजें जल्दी याद हो जाती है, कठिन से कठिन गणना भी हम चुटकियों में कर लेते हैं।

आज दुनिया में हम जो कुछ भी देख रहे हैं वह किसी न किसी व्यक्ति की मेहनत का ही नतीजा है। अगर थॉमस अल्वा एडिसन ने मेहनत ना की होती तो आज बल्ब का आविष्कार ना हुआ होता। अगर राइट बंधुओं ने मेहनत ना की होती तो हवाई जहाज का आविष्कार नहीं होता और ऐसे ही लाखों अन्य आविष्कार है जो मेहनत के परिणाम स्वरुप ही संभव हो पाए हैं। 

यह इंजीनियरों की मेहनत का ही परिणाम है कि उन्होंने समुंदर के बीच में भी पुल बना दिए हैं, लंबी-लंबी सड़के बनाई हैं और बड़े-बड़े समुद्री पोत बनाए हैं। यह डॉक्टरों की मेहनत का ही परिणाम है कि आज हर बीमारी का इलाज संभव है। आज यह संभव है कि एक व्यक्ति के दिल को दूसरे व्यक्ति के शरीर में लगाया जा सकता है। यहां तक कि मेडिकल क्षेत्र में इतनी तरक्की हो चुकी है कि आज डॉक्टर शारीरिक संरचना के साथ-साथ हमारी दिमागी संरचना को भी समझने में सक्षम हो गए हैं। 

यह हमारे शोधकर्ताओं और वैज्ञानिकों की मेहनत का ही परिणाम है कि हमारी दूसरे ग्रहों तक भी पहुंच संभव हो पाई है, हम तारों की गणना कर सकते हैं, मौसम का अनुमान लगा सकते हैं और एक जगह बैठे ही पूरी दुनिया की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। यह सब इंसान की कठोर मेहनत का ही परिणाम है।

आज इंसान सामाजिक, आर्थिक, वैज्ञानिक और औद्योगिक रूप से इतनी तरक्की कर पाया है तो यह सब कुछ उसकी कठोर मेहनत के परिणाम स्वरुप ही संभव हो पाया है। अक्सर जीवन में वही लोग सफल होते हैं जो लगातार मेहनत करते रहते हैं।

विद्यार्थी जीवन में परिश्रम का महत्व | Importance of hard work in student life

वैसे तो जीवन के प्रत्येक स्तर पर परिश्रम की आवश्यकता होती है। लेकिन विद्यार्थी जीवन में परिश्रम का महत्व और भी बढ़ जाता है। विद्यार्थी जीवन, जीवन का वह दौर होता है जब एक बच्चा उत्साह और उमंग से भरा होता है। जीवन के इस दौर में व्यक्ति का दिमाग नई नई चीजों को सीखने के लिए ज्यादा तत्पर रहता है। अगर एक विद्यार्थी के रूप में व्यक्ति इस समय परिश्रम नहीं करता और अपना यह अनमोल समय मौज मस्ती है और आलस्य में निकाल देता है तो वह जीवन में कभी सफल नहीं हो पाता। 

जबकि दूसरी तरफ यदि वह विद्यार्थी जीवन में मेहनत और परिश्रम से अपने लक्ष्य की तरफ अग्रसर रहता है तो वह एक ना एक दिन सफलता को हासिल कर लेता है। कड़ी मेहनत सफलता की कुंजी है और जीवन के प्रत्येक स्तर पर परिश्रम की आवश्यकता होती है। जब विद्यार्थी जीवन में ही परिश्रम करने की आदत बन जाती है तो यह आदत पूरी उम्र उसका साथ देती है और वह सफलता की सीढ़ियां चढ़ता जाता है।

परिश्रम जीवन का आधार है | Hard work is the basis of life

एक व्यक्ति को सुखी और समृद्ध जीवन जीने के लिए परिश्रम करने की आवश्यकता होती है। बिना परिश्रम किए सफलता को हासिल करना लगभग नामुमकिन है। वर्तमान में हर क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा इतनी तेजी से बढ़ रही है कि आप बिना परिश्रम किए कहीं भी टिक नहीं पाओगे। परिश्रम ही सुखी जीवन का आधार है। बिना परिश्रम के एक दिन निकालना भी मुश्किल हो जाता है। आपको खाना खाने के लिए भी मेहनत करनी पड़ती है। अगर हम दैनिक जीवन के इन छोटे छोटे कार्यों को देखेंगें तो हम पाएंगे कि हर छोटे से छोटे कार्य के पीछे भी मेहनत छिपी होती है।

परिश्रम करने के फायदे | Benefits of working hard

  • कड़े परिश्रम के दम पर दुनिया की किसी भी चीज को हासिल किया जा सकता है। चाहे वह धन दौलत हो, पैसा हो, शोहरत हो या फिर खुशी।
  • परिश्रम करने से शरीर चुस्त रहता है, दिमाग तरोताजा हो जाता है। जबकि दूसरी तरफ जो लोग मेहनत नहीं करते और पूरा दिन आलस्य में ही निकाल देते हैं तो बहुत सी बीमारियां उन्हें घेर लेती हैं।
  • शारीरिक परिश्रम से हमारा शरीर मजबूत होता है। जबकि मानसिक परिश्रम करने से हमारा दिमाग मजबूत होता है। इसलिए शारीरिक स्फूर्ति और मजबूती के लिए परिश्रम करने की सलाह दी जाती है।
  • परिश्रमी व्यक्ति जीवन में कभी असंतुष्ट नहीं होता क्योंकि जो उसे चाहिए होता है वह उसे अपनी मेहनत से हासिल कर लेता है।
  • परिश्रमी व्यक्ति के पास सुख सुविधा की सभी चीजें मौजूद रहती है इसलिए वह हमेशा खुश रहता है।

परिश्रम ना करने के नुकसान | Disadvantages of not working hard

  • आलसी व्यक्ति या जो परिश्रम करने से बचते हैं वह जीवन में कभी सफल नहीं हो पाते। वे जीवन में छोटी-छोटी जरूरतों को पूरा करने के लिए भी दूसरों पर निर्भर रहते हैं।
  • शारीरिक परिश्रम ना करने वाले या आलसी व्यक्ति हमेशा बीमारियों से घिरे रहते हैं। शारीरिक परिश्रम ना करने से उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हो जाती है जिसकी वजह से उनका शरीर बीमारियों का घर बन जाता है।
  • आलसी व्यक्ति हमेशा परिश्रम करने वाले व्यक्तियों से पिछड़ जाते हैं। जिसकी वजह से वे परिश्रम करने वालों से चिड़ते हैं और हमेशा उनको ताने मारते रहते हैं।
  • आलसी व्यक्ति हमेशा भाग्य के भरोसे रहता है और हमेशा यही सोचता रहता है कि अगर यह मेरे भाग्य में होगा तो मुझे मिल ही जाएगा। इसी गलत अवधारणा के कारण वह हमेशा साधारण और गरीबी में जीवन यापन करता रहता है।
  • आलसी व्यक्ति हमेशा आज का काम कल पर टाल देता है। जिसके कारण लोग उस पर भरोसा नहीं करते। लोगों की उसके प्रति यह अवधारणा बन जाती है कि यह व्यक्ति कभी अपना काम समय पर नहीं करता।

परिश्रम के महत्व पर दोहे | Quote on the importance of hard work

श्रम ही ते सब होत है,

जो मन सखी धीर।

श्रम से खोदत कूप ज्यों।

थल में प्रगटे नीर।

अभिप्राय -: कबीर के इस दोहे के अनुसार परिश्रम करने से सब कुछ संभव हो जाता है। संत कबीर कहते हैं कि यदि मन में धीर यानी धीरज रख कर जमीन में कुआं खोदा जाए तो वहां पानी अवश्य निकलेगा।

जिन खोजा तिन पाइयां गहरे पानी पैठ।

मैं बापुराव वुडन डरा रहा किनारे बैठ।

अभिप्राय -: कबीर के इस दोहे के अनुसार जो व्यक्ति जीवन में परिश्रम करता है वह इस जीवन रूपी समुंदर से सफलता के मोती हासिल कर लेता है। लेकिन जो मेहनत करने से डरता है और जीवन रूपी समुंदर में उतरने से मना कर देता है वह इसे किनारे बैठा हमेशा पछताता रहता है।

उधम कभी न छोड़िए, पर आशा के मोद। 

गागरी कैसे फोरिए, उन्हों देखी प्रयोद।

अभिप्राय -: संत कविवर वृंद के इस दोहे के अनुसार व्यक्ति को भाग्य के भरोसे न बैठकर हमेशा मेहनत करते रहना चाहिए। अगर आकाश में घने बादलों को देखकर हम इस अनुमान में की बहुत सारा पानी बरसने वाला है, अपने घर में रखे पानी के घड़े को तोड़ देते हैं तो यह हमारी मूर्खता है। इस बात की आशा न करें कि भविष्य में अच्छा समय आएगा और इस अच्छे समय की अभिलाषा में हम अपने वर्तमान समय को भी व्यर्थ जाने दे।

करत करत अभ्यास के, 

जड़मति होत सुजान।

रसरी आवत जात है, 

सिल पर पड़े निशान।

अभिप्राय -: कविवर वृंद के इस दोहे के अनुसार लगातार परिश्रम करते रहने से एक मूर्ख व्यक्ति भी विद्वान बन जाता है। इसलिए मेहनत करने से ना घबराए। क्योंकि कुए में पड़ी रस्सी भी जब बार-बार आती जाती है तो पत्थर पर भी निशान बना देती है।

श्रम से ही सब कुछ होत है, 

बिना श्रम मिले कुछ नाही। 

सीधे उंगली घी जमो, 

कबसू निकले नाही।

अभिप्राय -: संत कबीर के इस दोहे के अनुसार इस संसार में परिश्रम के दम पर ही सब कुछ हासिल किया जा सकता है। बिना परिश्रम के कुछ भी हासिल करना लगभग असंभव है। जिस तरह जमे हुए घी को सीधी उंगली से नहीं निकाला जा सकता। उसी तरह परिश्रम के बिना भी जीवन में कुछ भी हासिल नहीं किया जा सकता।

परिश्रम का महत्व प्रस्तावना | Importance of hard work

इस निबंध को पढ़कर शायद आप परिश्रम के महत्व को समझ गए होंगे। परिश्रम ही सच्चा धन है। परिश्रम के बल पर जीवन में कुछ भी हासिल किया जा सकता है। कड़ी मेहनत सफलता की कुंजी है। बिना मेहनत के आप सफलता हासिल करने के बारे में सोच भी नहीं सकते। परिश्रम जीवन का आधार है। बिना परिश्रम के जीवन की कल्पना करना लगभग असंभव है।

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