ब्रेन रूल्स बुक समरी | Brain Rules Book Summary In Hindi

“संसार में कोई भी ऐसी समस्या नहीं है जो आपके मन की शक्ति से अधिक शक्तिशाली हो।”

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दोस्तों यह Brain Rules Book Summary In Hindi अमेरिका के महान लेख़क John Medina की बेस्टसेलिंग बुक Brain Rules for Aging Well पर आधारित है। इस बुक में उन्होंने दिमाग़ के 12 रूल्स के बारे में बताया है, इन 12 Brain rules in Hindi को जानकर आप अपने दिमाग़ की परफॉरमेंस को 34 परसेंट तक बढ़ा सकते है।

ये ब्रेन रूल्स आपके जीवन व सोचने के नजरिये को बदल सकते है। आप चाहे महिला है या पुरुष, यह Brain Rules Book Summary In Hindi आपके लिए एक Life Changing Book Summary साबित हो सकती है। आपको इस Book Summary In Hindi से बहुत कुछ सीखने को मिलेगा।

John Medina Brain rules Book in Hindi

Brain Rules Book Summary In Hindi

ब्रेन रूल्स बुक समरी हिंदी में

इंसान के पास दुनिया की सबसे पावरफुल चीज है। जिसकी मदद से वह मुश्किल से मुश्किल काम भी बड़ी आसानी से कर लेता है और वह है इंसान का दिमाग। दुनिया में आज तक जितने भी आविष्कार हो चुके हैं या फिर भविष्य में होने वाले हैं वह सभी इंसानी दिमाग की वजह से ही संभव हो पाया है। आज वैज्ञानिक कुछ हद तक इंसानी दिमाग को समझ पाने में सक्षम हो पाए हैं और यह पता कर पाए हैं कि यह कैसे काम करता है।

एक अमेरिकी डेवलपमेंट मॉलिक्यूलर बायोलॉजीस्ट, जॉन डी मेडिना के अनुसार कुछ तरीकों का इस्तेमाल करके हम अपने दिमाग की परफॉर्मेंस को 34% तक बढ़ा सकते हैं।

इस वैज्ञानिक ने काफी सारी ब्रेन रिसर्च के बाद एक किताब लिखी है जिसका नाम Brain Rules for Aging Well। उनके द्वारा लिखी इस किताब में उन्होंने उन 12 ब्रेन रूल्स के बारे में बताया है जिन्हें जानकर हम अपने दिमाग की परफॉर्मेंस को 34% तक बढ़ा सकते हैं।

जॉन मैडीना ने अपने करियर का अधिकतर समय लोगों की मेंटल हेल्थ को समझने में लगाया है। इनका मुख्य रिसर्च एरिया है -: आइसोलेशन एंड कैरक्टराइजेशन ऑफ जींस इन वर्ल्ड इन ह्यूमन ब्रेन डेवलपमेंट ( Isolation and characterization of genes in World in Humans Brain Development )।

तो चलिए पढ़तें हैं ‘Brain Rules Book Summary In Hindi‘ के इन 12 ब्रेन रूल्स के बारे में।

विषय सूचि।

1.- शारीरिक एक्सरसाइज से दिमाग़ की पावर बढ़ती है।

दिमाग के इस रूल के अनुसार शारीरिक एक्सरसाइज से हमारे दिमाग की सोचने समझने की क्षमता बढ़ती है। वैज्ञानिक रिसर्च से यह साबित हो चुका है कि जो लोग शारीरिक एक्सरसाइज करते हैं उनकी सोचने समझने, स्मरण रखने और तुरंत फैसला लेने की क्षमता उन लोगों से अच्छी होती है, जो शारीरिक एक्सरसाइज नहीं करते।

मनुष्य में दिमाग का विकास उस समय हुआ था जब आदिमानव के रूप में इंसान जंगलों में रहता था, पशुओं का शिकार करता था। उसे भोजन व अन्य आवश्यकताओं कि पूर्ति के लिए मिलों पैदल चलना पड़ता था और उसे जानवरों के शिकार के लिए भागना – दौड़ना पड़ता था। इसलिए उस समय आदिमानव के दिमाग ने इस तरह की परिस्थितियों में ज्यादा तेजी से विकास किया।

एक रिसर्च के अनुसार जब हम शारीरिक एक्सरसाइज करते हैं तो हमारे दिमाग को ब्लड की सप्लाई पहुंचती है और हमारे दिमाग को एनर्जी व ग्लूकोस मिलती है, जो हमारे दिमाग के जहरीले इलेक्ट्रॉन को बाहर निकाल देती है और हमारा दिमाग तेजी से विकास करता है।

2.- समय के साथ ही मनुष्य के दिमाग़ का विकास होता रहता है।

दिमाग के इस रूल के अनुसार रिसर्चर यह बताते हैं कि हमें यह दिमाग पाने में लाखों साल लगे हैं। शुरुआत में हमारे पास केवल एक छिपकली वाला दिमाग था जिसकी मदद से हम केवल कुछ बेसिक कार्य ही कर पाते थे जैसे कि सांस लेना, सोना, खाना आदि।

हजारों सालों तक मनुष्य ने इसी दिमाग के सहारे काम किया है। वह कोई जटिल कार्य नहीं कर पाता था। लेकिन हजारों सालों बाद मनुष्य के दिमाग के एक नए हिस्से का विकास हुआ जिसका नाम था अमीगडला ( Amygdala )। यह दिमाग एक बिल्ली के दिमाग जितना सक्षम था। इस दिमाग से आदिमानव अब शिकार को देखकर उसे मार सकता था और दूसरे जंगली जानवरों से अपनी रक्षा कर सकता था।

आखिरकार हजारों साल बाद दिमाग के एक नए हिस्से कोर्टेक्स ( Cortex ) का विकास हुआ। अब आदि मानव का दिमाग शरीर के दूसरे हिस्सों के साथ कम्युनिकेशन कर सकता था। जिसकी वजह से अब वह विभिन्न आवाज निकाल सकता था। उसकी स्मरण क्षमता पहले से बहुत ज्यादा तेज हो गई थी।

यह सब इसलिए हुआ क्योंकि आदिमानव ने अब चार पैरों की जगह दो पैरों पर चलना सीख लिया था। इसलिए उसके शरीर की एनर्जी अब चलने में कम उपयोग होती थी और वह एक्स्ट्रा एनर्जी उसके दिमाग के विकास में प्रयोग होने लगी। जिसकी वजह से उसके दिमाग में बहुत तेजी से विकास हुआ।

3.- दुनिया में सभी का दिमाग़ अलग अलग तरह से काम करता है।

दिमाग के इस रूल के अनुसार दुनिया के सभी व्यक्तियों के दिमाग की संरचना अलग-अलग होती है और इसी कारण उनके सोचने समझने, बात करने और दूसरों के साथ व्यवहार करने के तरीकों में भी अंतर पाया जाता है।

वैज्ञानिकों के रिसर्च के अनुसार यदि दो व्यक्तियों को एक जैसी कंडीशन में रखा जाए और उनके साथ बिलकुल एक जैसी सिट्यूएशन क्रिएट की जाए, तो भी उनके दिमाग अलग अलग इंफॉर्मेशन स्टोर करते हैं और उस सिचुएशन के साथ अलग अलग तरह से रिएक्ट करते है। इसिलए जरुरी नहीं है की किन्ही विशेष परिस्थितियों में जैसा आप सोच रहे है वैसा ही सामने वाला भी सोचे।

इसलिए कई बार हमने देखा होगा की हमारे परिवार या यार – दोस्तों में कुछ बातों को लेकर मतभेद हो जाते है। हम सभी अपनी बात को ही सही मानते है। जबकि ऐसा करना सही नहीं है। क्या पता जिस एंगल से सामने वाला उस चीज को देख रहा है, वह भी सही हो। इसलिए दूसरों के ओपिनियन का भी सम्मान करें।

4.- हमारा दिमाग़ उबाऊ चीजों के साथ कम रिएक्ट करता है।

दिमाग के इस रूल के अनुसार हमारा दिमाग एक समय पर सिर्फ एक ही कार्य करने के लिए बना है और मल्टीटास्किंग के लिए कभी बना ही नहीं था। हमारा दिमाग केवल उन्हीं इंफॉर्मेशन को लंबे समय तक स्टोर करके रखता है जिन इंफॉर्मेशन से हम इमोशनली अटैच होते हैं।

कई बार आपने देखा होगा कि टीवी पर दिखाई जाने वाली एडवर्टाइजमेंट इमोशनल होती है। यह इसलिए होता है ताकि हम उस एडवर्टाइजमेंट से इमोशनली अटैच होकर उसे ध्यान से देखें और उस इंफॉर्मेशन को ज्यादा लंबे समय तक स्टोर करके रख सके। इसलिए हमें किसी भी इंफॉर्मेशन को लंबे समय तक स्टोर करके रखने के लिए उसके साथ इमोशनली अटैच हो ना चाहिए।

5.- चीजों को याद रखने के लिए उन्हें लगातार दोहराते रहें।

दिमाग के इस रूल के अनुसार यदि हमें स्मरण शक्ति की प्रॉब्लम है, तो इस रूल की मदद से हम उसे सही कर सकते हैं। जब हम एक विशेष कंडीशन में किसी इंफॉर्मेशन को सीखते हैं और उन्हीं विशेष कंडीशन में हम उस इनफार्मेशन को रीकॉल यानी याद करते हैं तो वह जल्दी याद आ जाती है।

यानी अगर हम एग्जाम की तैयारी कर रहे हैं, तो अगर हम अपने स्टडी रूम को एग्जाम हॉल की तरह देखते हैं और उस में बैठकर उसी तरह से एग्जाम की तैयारी करते हैं जैसे हम एग्जाम हॉल में बैठे हैं। तो इससे यह होता है कि जब हम वास्तव में एग्जाम हॉल में बैठकर एग्जाम देते हैं तो वह इंफॉर्मेशन जो हमने अपने स्टडी रूम में बैठकर learn की थी वह हमें जल्दी याद आ जाती हैं।

6.- चीजों को एक दूसरे के साथ Relate करके पढ़ें।

एक रिसर्च के अनुसार जब कोई इंफॉर्मेशन हम याद करते हैं तो उसका एक काफी बड़ा हिस्सा याद करने के कुछ मिनट बाद ही हमारे दिमाग से डिलीट हो जाता है। इसलिए यदि हमें चीजों को लंबे समय तक याद करके रखना है तो हमें उस इंफॉर्मेशन से संबंधित दूसरी इनफॉरमेशंस को भी याद करना पड़ेगा और उन्हें एक निश्चित समय के बाद लगातार दोहराते भी रहना होगा।

यह हमारे हिप्पोकेंपस और कोर्टेक्स के आपसी तालमेल से संभव हो पाता है, जिसकी वजह से हमारा दिमाग़ एक Particular Thing से संबंधित सभी इंफॉर्मेशन को एक जगह स्टोर कर लेता हैं और वह Information हमें लंबे समय तक याद रहती है।

7.- अच्छी नींद से हमारे सोचने की शक्ति बढ़ती है।

दिमाग के इस रूल के अनुसार हमारे सोचने – समझने व हमारे दिमाग के काम करने की पूरी प्रक्रिया सीधे तौर पर हमारे नींद लेने के समय से प्रभावित होती है। यानी अगर हम अच्छी नींद लेते हैं तो हमारे दिमाग के काम करने की क्षमता इम्प्रूव होती है।

एक रिसर्च के अनुसार जब नासा के वैज्ञानिक अपने काम के दौरान एक 26 मिनट का पावर नैप ( नींद की झपकी ) ले लेते हैं तो उनके काम करने की क्षमता 34% तक बढ़ जाती है। नींद के दौरान हमारे दिमाग के न्यूरॉन ज्यादा एक्टिव होते हैं और जो इंफॉर्मेशन हमने पूरे दिन कलेक्ट की होती है वह उसे सोते समय Replay करते हैं। जिसकी वज़ह से वह इनफार्मेशन हमें ज़्यादा दिन तक याद रहती है।

जबकि दूसरी तरफ जब हम सही से नींद नहीं ले पाते तो इसकी वजह से हमें नकारात्मक रूप से प्रभावित होना पड़ता है। इसके कारण हमारी स्मरण शक्ति कमजोर होने लगती है। नींद कम लेने से हमारी अटेंशन कम हो जाती है और हमारी तर्क शक्ति भी नकारात्मक रूप से प्रभावित होती है। तथा इसके अलावा हमें कई प्रकार की शारीरिक समस्याओं का भी सामना करना पड़ता है।

8.- तनाव से दिमाग़ की सोचने की पॉवर कम होती है।

दिमाग के इस रूल के अनुसार तनाव के समय हमारे दिमाग की परफॉर्मेंस काफी हद तक कम हो जाती है और इस कारण हमारे दिमाग की सोचने समझने, तर्क करने और स्मरण क्षमता पर भी नकारात्मक रूप से प्रभाव पड़ता है।

यह इस कारण से है कि तनाव या स्ट्रेस के समय हमारा दिमाग कुछ हारमोंस प्रोड्यूस करता है, जिनका नाम है कॉर्टिसोल ( Cartisol ) व एड्रिनल ( adrenal )। यह हारमोंस तनाव के समय हमारे दिमाग को कुछ समय के लिए तो सतर्क कर देते हैं, लेकिन अगर लंबे समय तक हम तनावग्रस्त रहते हैं तो यह हारमोंस हमारे शरीर में कई तरह की शारीरिक समस्याओं का कारण भी बन जाते हैं।

जिनकी वजह से हमें हार्ट अटैक, यादाश्त कम होना और विभिन्न मानसिक और शारीरिक समस्याओं का खतरा भी हो सकता है।

9.- एक से ज्यादा ज्ञानेंद्रियों के एक्टिव होने पर चीज़ लम्बे समय तक याद रहती है।

दिमाग के इस रूल के अनुसार हम किसी इंफॉर्मेशन को याद करने के लिए अपनी जितनी अधिक ( Senses ) ज्ञानेंद्रियों का प्रयोग करते हैं वह इंफॉर्मेशन हमें उतना जल्दी याद होती है।

कई बार अपने देखा होगा की जब आप बाज़ार या किसी अन्य जग़ह किसी मिठाई की दुकान के पास से गुजरते है तो मिठाइयों की महक से आपको अपने जीवन में घटी वे सभी घटनाएँ याद आ जाएगी जो इससे सम्बंधित होगी जैसे की आपकी सबसे पसंदीदा मिठाई या आपके पास की उस मिठाई की दुकान की तस्वीर जहाँ मिठाई खरीदने के लिए आप सबसे ज़्यादा बार जाते है।

यह इसलिए होता है क्योंकि हमने यहां अपनी एक से ज्यादा सेंसस ( senses ) का इस्तेमाल किया। इसलिए पढ़ाई के दौरान यदि हम अपने स्टडी रूम में कोई विशेष रूम फ्रेशनर या परफ्युम का प्रयोग करें तो अगर हम उस रूम फ्रेशनर या परफ्यूम की स्मेल को और कहीं भी महसूस करते हैं तो वहां भी हमें अपने स्टडी रूम की याद आए जाएगी।

10.- सुनी हुई इनफार्मेशन की बजाय देखी गई इनफार्मेशन लम्बे समय तक याद रहती है।

इस ब्रेन रूल के अनुसार हमारी देखने वाली ज्ञानेंद्री यानि हमारी आंख, हमारी दूसरी सभी ज्ञानेंद्रियों से ज्यादा ताकतवर होती है। हमें लिखी या सुनी गई इंफॉर्मेशन की बजाय देखी गई इंफॉर्मेशन ज्यादा समय तक याद रहती है। एक उदाहरण के अनुसार जब हम किसी इंफॉर्मेशन से रिलेटेड कोई वीडियोस या कोई मूवी देखते हैं तो वह हमें लंबे समय तक याद रहती है।

कई बार हम ने देखा होगा की हमारे द्वारा देखी गई किसी मूवी के डायलॉग हमें कम याद रहते जबकि हमें उस मूवी के सीन पूरे याद रहते है और सिनेमा हॉल से निकलने के बाद भी हम पूरी फ़िल्म की कहानी बता सकते है। यह इसलिए होता है की उस समय हमारी विज़न सेंस के ज्यादा एक्टिव होने के कारण हमारा दिमाग़ उन चीजों के प्रति ज़्यादा एक्टिव हो जाता है और उन सभी इनफार्मेशन को सही से स्टोर कर पता है। इसलिए किसी भी इनफार्मेशन को लम्बे समय तक याद रखने के लिए इनफार्मेशन को सुनने के साथ साथ देखना भी जरूरी है।

11.- एक महिला और एक पुरुष का दिमाग़ बिल्कुल अलग तरीके से काम करता है।

इस ब्रेन रूल्स के अनुसार एक आदमी व एक औरत के दिमाग पूरी तरह से अलग-अलग होते हैं। जिसकी वजह से उनके सोचने समझने के तरीके तथा एक जैसी कंडीशन में रिएक्ट करने के तरीके भी अलग होते हैं।

एक रिसर्च के अनुसार जब किसी आदमी व औरत को एक जैसे स्ट्रेस लेवल में रखा जाता है तो औरतों के दिमाग का लेफ्ट हेमिस्फीयर यानी Amygdala एक्टिव हो जाता है और वे सिर्फ इमोशनल चीजों के बारे में ही सोचती है। जबकि दूसरी तरफ ऐसी सिचुएशन में एक आदमी के दिमाग का Right Hemisphere यानी Amygdala एक्टिव हो जाता है और वह सिर्फ सॉल्यूशंस के बारे में सोचता हैं।

ऐसा इसलिए होता है कि एक आदमी और एक औरत में जेनेटिकली अंतर ( Genetically different ) होता हैं। जहां एक औरत का एक्स क्रोमोजोम अपने माता-पिता दोनों से मिला होता है। जबकि एक आदमी को एक्स क्रोमोजोम सिर्फ अपनी मां से मिला होता है। जबकि उसके वाई क्रोमोजोम में 100 से भी कम जिन होते हैं।

12.- हम बचपन से ही जिज्ञासु प्रवृति के होते है।

इस ब्रेन रूल्स के अनुसार इंसान जब पैदा होता है तो वह एक क्यूरियस माइंड के साथ पैदा होता है। जब हम छोटे होते हैं तो हर चीज को जानना चाहते हैं। इसलिए हर चीज को देख कर हमारे मन में कुछ न कुछ questions उभरते रहते हैं और हम बचपन में ही एक्टिव लर्निंग सीख लेते हैं। यानी पहले हम चीजों पर एक्सपेरिमेंट करते हैं, उसमें गलतियां करते हैं और फिर आखिर में conclusion पर आते है।

इसलिए कई बार छोटे बच्चे जब हमसे कोई सवाल करते है तो हमें उन्हें डाटना नहीं चाहिए बल्कि उनकी सवालों का ज़वाब देना चाहिए ताकि बचपन से ही उनका दिमाग़ ज़्यादा एक्टिव हो सके। जब बच्चों को अपने सवालों का सही ज़वाब मिल जाता है तो उनके दिमाग़ में उसी सवाल से सम्बंधित और इनफार्मेशन को जानने की जिज्ञासा पैदा होती है और इसी एक्टिव लर्निंग के कारण बच्चों के दिमाग़ का विकास बहुत तेज़ी से होता है।

What You Learn From This Brain Rules Book Summary In Hindi ?

इस तरह से इस ब्लॉग के माध्यम से हमनें इन 12 Brain rules in Hindi के बारे में जाना है। आदमी का दिमाग़ दुनिया की सबसे ताकतवर चीज़ है। इंसान सिर्फ सोचने भर से ही बड़े से बड़ा काम कर सकता है। सभी बीमारियों का इलाज हमारे दिमाग में ही होता है। सिर्फ सोचने भर से ही हम बड़ी से बड़ी बीमारी को भी ठीक कर सकते है। हमारे सोचने का नजरिया ही हमारे जीवन को दिशा देता है। हम जैसा सोचते है वैसे ही बन जाते है और यह सब हमारे दिमाग के कारण ही संभव हो पाता है।

ये सभी बातें मैंने आपको अमेरिकी बायोलॉजिस्ट जॉन डी मेडिना द्वारा लिखी बुक ‘ब्रेन रूल्स फॉर एजिंग वेल’ से बताई है।

यह बुक ‘Brain Rules for Aging Well’, John D Medina ने काफी सालों की ब्रेन रिसर्च के बाद लिखी है। अगर आप इस बुक को पढ़ना चाहते है, तो आप निचे दिए गए लिंक से इसे खरीद सकते है।

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