राजू और डब्बू की कहानी | Bachon Ki Kahani in Hindi

“अन्य लोग हमेशा आपकी वास्तविक पहचान को परिभाषित नहीं कर सकते हैं। वे वही देखते हैं जो वे देखना चाहते हैं,

— ANONYMOUS

वास्तविक जीवन पर आधारित यह ‘राजू और डब्बू की मोटिवेशनल कहानी’ आपके जीवन व सोचने के नजरिये को बदल सकती है। आप एक महिला है या पुरुष, यह BACHON KI KAHANI IN HINDI आपके लिए एक प्रेरणादायक कहानी साबित हो सकती है।

BACHON KI KAHANI IN HINDI

Bachon Ki Kahani in Hindi

कहते हैं कि आत्मविश्वास में बड़ी शक्ति है। जब आत्मविश्वास की शक्ति का संचार व्यक्ति में होता है तो वह असंभव दिखने वाले कार्यों को भी बड़ी आसानी से कर देता है और लोग यह देखकर हैरान रह जाते हैं और वे यह सोचने के लिए मजबूर हो जाते है की यह कैसे संभव हो सकता है। लेकिन यह सच कि जब आप खुद पर विश्वास कर लेते हैं और कुछ करने की ठान लेते है, तो आपका जीतना तय है। आत्मविश्वास का मतलब है, खुद पर यह दृढ़ विश्वास रखना कि ” मैं ऐसा कर सकता हूं।” 

ऊपर कही गई बातों को सही साबित करती एक छोटी सी कहानी मैं आपको बताता हूं जिसे पढ़कर आप समझ जाएंगे कि असंभव कुछ भी नहीं है, यह सिर्फ आपके सोचने का नजरिया है जो आपको सफल या असफल होने में मदद करता है।

कन्नूर, हिमालय की तलहटी में बसा एक छोटा सा गांव था, जोकि छोटी-छोटी पहाड़ियों से घिरा हुआ था। यहाँ राजू और डब्बू दो शैतानी बच्चे रहते थे। इनकी शैतानी के किस्से पूरे गांव में प्रसिद्ध थे। राजू, डब्बू से 5 साल बड़ा है और शरीर में भी अपनी उम्र के दूसरे बच्चों से काफी भारी था। जहाँ राजू की उम्र 12 साल थी वहीं डब्बू की उम्र केवल 7 साल थी।

एक बार राजू और डब्बू खेलते खेलते जंगल में चले गए। यह पहली बार नहीं था, इससे पहले भी कई बार वो दोनों जंगल में आ चुके थे। बहुत देर तक जंगल में घूमने के बाद जब उनको बहुत जोर से प्यास लगी तो पानी पीने के लिए वे दोनों पास में ही एक कुए पर चले गए। 

जंगल में बहुत देर तक घूमने के कारण वे बहुत थक चुके थे। जब राजू कुए से पानी खींच रहा था तो उसका पैर फिसल गया और वह कुएं में जा गिरा। क्योंकि शाम का समय था और अंधेरा भी होने वाला था, इसीलिए यह सब देख कर डब्बू बहुत डर गया।

जब वह डरते डरते कुए के पास पहुंचा और उसने कुएं में झांक कर देखा तो उसने देखा की कुआँ बहुत गहरा था और अंधेरे की वजह से राजू दिखाई भी नहीं दे रहा था। कुए का पानी बहुत ठंडा होने की वजह से राजू को बहुत ठंड लग रही थी और इसी डर और ठंड की वजह से उसकी आवाज भी धीमे-धीमे आ रही थी और वह रोते-रोते चिल्ला रहा था कि “डब्बू मुझे बचाओ। डब्बू मुझे बचाओ।” 

जवाब में डब्बू ने कहा कि राजू तुम कहां हो। तुम मुझे दिखाई नहीं दे रहे हो। तो राजू ने कहा कि डब्बू मैं इस कुएं में गिर गया हूं। तुम आसपास देखो अगर कोई हो तो उसे बुला कर लाओ।

डब्बू ने कहा कि हां मैं देखता हूं और वह आसपास किसी को देखने के लिए जाता है, लेकिन उसे दूर दूर तक भी कोई दिखाई नहीं दिया। अंधेरा होने ही वाला था और उनको पता था कि शाम के समय जंगल में कोई नहीं आता। इसलिए इस समय किसी व्यक्ति को ढूंढने का प्रयास बेकार था।

जब डब्बू ने राजू को बताया कि वहाँ आस-पास कोई भी नहीं था, तो राजू और जोर से रोने लगा। डब्बू से राजू का इस तरह से रोना अच्छा नहीं लग रहा था। उसने राजू से कहा कि “ राजू ! तुम रस्सी पकड़ो। मैं तुम्हें ऊपर खींचता हूं। “ उसकी यह बात सुनकर राजू को विश्वास नहीं हुआ कि डब्बू ऐसा कर सकता है। क्योंकि उसको पता था कि डब्बू  उससे बहुत छोटा था और राजू का वजन भी बहुत भारी था। लेकिन उसने सोचा कि इसके अलावा कोई रास्ता भी तो नहीं है और एक बार कोशिश करने में क्या जाता है। 

राजू ने रस्सी को जोर से पकड़ा और डब्बू को ऊपर खींचने के लिए कहा। डब्बू के पूरी ताकत लगाने के बाद भी वह राजू को एक इंच भी ऊपर नहीं खींच पाया। लेकिन जब कुँए में से राजू ने आवाज लगाई कि “ डब्बू तुम कर सकते हो। थोड़ी और ताकत लगाओ। “ तो डब्बू में एक अजीब सी शक्ति का संचार हुआ और उसने अपनी पूरी ताकत लगाकर राजू को कुएं से बाहर निकाल दिया। कुँए से बाहर आने के बाद राजू बहुत खुश हुआ और उसने डब्बू को गले से लगा लिया। अंधेरा हो चुका था, इसीलिए वे जल्दी से घर की तरफ निकल पड़े। 

अगले दिन जब उन्होंने यह बात गांव वालों को बताई तो गांव के किसी भी व्यक्ति ने उनका विश्वास नहीं किया। सबको यही लग रहा था कि यह शरारती बच्चे हैं और झूठ बोल रहे होंगे। दूसरा वे इस बात के कारण भी उन पर विश्वास नहीं कर रहे थे कि इतना छोटा सा बच्चा डब्बू भला इतने भारी भरकम राजू को कुएं से बाहर कैसे निकाल सकता है। 

लेकिन गांव में एक बुजुर्ग व्यक्ति ऐसा भी था जो उनकी बातों पर विश्वास कर रहा था। गांव वाले उस बुजुर्ग व्यक्ति को बहुत ही समझदार मानते थे और अपनी छोटी मोटी समस्याओं के लिए उस से सलाह मशवरा भी लेते थे। जब गांव वालों को पता चला कि वह बुजुर्ग व्यक्ति राजू और डब्बू की इस बात को सच मान रहे हैं तो इसका कारण जानने के लिए वे उस बुजुर्ग व्यक्ति के पास गए। 

जब गांव वालों ने उस बुजुर्ग व्यक्ति से पूछा कि ऐसा क्या कारण है कि आपको इन दोनों शरारती बच्चों की बातें सच लग रही है और यह कैसे सच हो सकता है कि इतना छोटा सा बच्चा डब्बू इतने भारी भरकम राजू को कुएं से बाहर निकाल सकता है। तो इसके जवाब में उस बुजुर्ग व्यक्ति ने कहा कि “ जिस समय डब्बू राजू को कुएं से बाहर निकाल रहा था उस समय कोई ऐसा व्यक्ति वहां मौजूद नहीं था जो उससे यह बता सकता की “तू यह नहीं कर सकता।”

दूसरा यह कि जब राजू ने डब्बू से कहा कि “ तुम कर सकते हो। थोड़ी और ताकत लगाओ, तो डब्बू को अंदर से यह विश्वास हो गया कि वह कर सकता है और यह उसकी आत्मविश्वास की शक्ति थी जिसने यह कर दिखाया। 

उस बुजुर्ग व्यक्ति की यह बातें सुनकर सभी गांव वालों को यह विश्वास हो गया कि राजू और दब्बू सच बोल रहे हैं। इस घटना के बाद राजू डब्बू ने भी शरारत करना बंद कर दिया और वे अच्छे बच्चे बन गए।

WHAT YOU LEARN FROM THIS ‘Bachon Ki Kahani in Hindi’ ?

  1. दूसरों की बातों का हमारे ऊपर बहुत प्रभाव पड़ता है इसलिए दूसरे लोगों की नकारात्मक बातों को नजरअंदाज करें। आप में कितनी क्षमता है यह सिर्फ आपको पता है, दूसरों को नहीं।
  1. प्रोत्साहना में बहुत शक्ति है। प्रोत्साहना से ऐसे काम भी संभव हो जाते हैं जो नामुमकिन दिखते हैं जैसे कि डब्बू ने कर दिखाया। इसीलिए हमेशा खुद को प्रोत्साहित करते रहें।
BACHON KI KAHANI IN HINDI
इनके बारे में भी पढ़ें -:

आपको मेरा यह ब्लॉग “राजू और डब्बू की कहानी | BACHON KI KAHANI IN HINDI ‘ कैसा लगा, मुझे कमेंट करके बताएं।

और अगर आपको मेरा यह ब्लॉग “राजू और डब्बू की कहानी | BACHON KI KAHANI IN HINDI” अच्छा लगा हो तो इसे अपने दोस्तों को भी शेयर करें।

ताकि जो लोग जीवन में कुछ करना  चाहते है, कुछ बनना चाहते।  लेकिन जीवन की मुसीबतों के कारण हार मान कर बैठ गए है वे इस BACHON KI KAHANI IN HINDI से inspire हो सके , motivate हो सके।

मेरे फेसबुक पेज पर जाकर इसे लाइक व अपने दोस्तों के साथ शेयर करें, लिंक नीचे दे दिया गया है।

https://www.facebook.com/successmatters4me-113401247074883

One Comment

Add a Comment

Your email address will not be published.